लखनऊ में कॉल सेंटर खोलकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी, पुलिस ने 16 लोगों को किया गिरफ्तार
लखनऊ के अलीगंज में एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है, जहां से अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
HighLights
अलीगंज में फर्जी कॉल सेंटर से अमेरिकी नागरिकों को ठगा जा रहा था।
पुलिस ने मौके से 4 युवतियों सहित 16 लोगों को गिरफ्तार किया है।
फर्जी हेल्पलाइन और एनी डेस्क ऐप से बैंकिंग जानकारी चुराई जाती थी।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। अलीगंज में कपूरथला पुलिस चौकी से महज 20 कदम की दूरी पर कॉल सेंटर खोलकर अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले गिरोह का राजफाश हुआ है। पुलिस ने मौके से चार युवतियों समेत 16 लोगों को पकड़ा है। उनके पास से मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर बरामद हुए हैं।
शुक्रवार तड़के करीब चार बजे सिपाही विपिन कुमार वर्मा गश्त पर थे। उन्होंने रिध्या पैलेस के बाहर एक संदिग्ध युवक को देखा और उससे पूछताछ की। युवक ने कहा कि वह अपने दोस्त का इंतजार कर रहा है। सिपाही ने उसके दोस्त को फोन करने को कहा।
फोन करने पर पता चला कि उसका दोस्त ठाकुरगंज में है, उसे अलीगंज नहीं आना था। इस पर सिपाही को शक हुआ। उसने पुलिस अधिकारियों को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और संदिग्धों को पकड़ लिया।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोग अमेरिकी नागरिकों को साफ्टवेयर और तकनीकी सेवाएं देने के लिए फर्जी हेल्पलाइन नंबर का इस्तेमाल करते थे।
जब ग्राहक तकनीकी सहायता के लिए कॉल करते थे, तो उनकी कॉल इंटरनेट के जरिए इस कॉल सेंटर में पहुंच जाती थी। ये लोग खुद को सर्विस सेंटर का प्रतिनिधि बताकर एनी डेस्क एप के माध्यम से ग्राहकों के कंप्यूटर तक पहुंच जाते थे और उनकी बैंकिंग जानकारी चुरा लेते थे।
चार माह पहले किराए पर लिया गया कार्यालय
यह कॉल सेंटर करीब चार महीने पहले किराए पर लिया गया था। इनमें दो मैनेजर शामिल हैं, जिन्हें 30 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। अन्य कॉलग करने वालों को 18 हजार रुपये और युवतियों को 20 से 25 हजार रुपये मिलते थे। अधिकांश पश्चिम बंगाल और गुजरात के निवासी हैं। पुलिस गिरोह के सरगना तक नहीं पहुंच पाई है, लेकिन यह जानकारी मिली है कि उसके तार गुजरात से जुड़े हैं।
पकड़े गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। पता चला है कि ये लोग अमेरिकी नागरिकों की जानकारी जुटाकर दूसरी टीम को देते थे। उसके बाद दूसरी टीम का काम शुरू होता था। वे पैसे निकलाते थे। दूसरी टीम कहां पर बैठकर काम कर रही है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। उनके पकड़े जाने पर पता चलेगा कि पैसा किस माध्यम से ठगों तक पहुंचता था। -अमित कुमार आनंद, पुलिस उपायुक्त, उत्तरी।
