90 के दशक में डीजल टेंपो से लगता था जाम, आज ई-रिक्शा बने समस्या, ओवरब्रिज पार्किंग और सख्ती से मिलेगी राहत
लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या से यातायात समस्या गंभीर हो गई है, जिसके समाधान के लिए पूर्व अपर परिवहन आयुक्त ने कई सुझाव दिए हैं।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
ई-रिक्शा को मुख्य मार्गों से हटाकर अन्य मार्गों पर संचालित करें।
ओवरब्रिज के नीचे पार्किंग बनाकर अतिक्रमण और जाम से राहत मिलेगी।
प्रतिबंधित मार्गों की नई सूची जारी कर ई-रिक्शा की निगरानी बढ़ाएं।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। शहर का विस्तार होने के साथ ही ई-रिक्शा का पंजीकरण बिना रोक-टोक तेजी से बढ़ता जा रहा। लोगों को आवागमन में सुविधा दिलाने के नाम पर शुरू हुए ई-रिक्शा बेतहाशा बढ़ने से बड़ी समस्या बन गए हैं। इनका पंजीकरण रोका जाना चाहिए या शहर में संख्या तय करके चलाया जाए या फिर अन्य उपाय करके समस्या से निजात पाई जा सकती है?
सोमवार को जागरण विमर्श में पूर्व अपर परिवहन आयुक्त राजीव श्रीवास्तव ने तीन तरह (तत्काल, कुछ महीनों में और आने वाले समय में) के सुझाव देते हुए साफ कहा कि पंजीकरण रोकना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि मुख्य मार्गों से हटाकर इनका संचालन कराया जाए, नियमित सख्त निगरानी हो और सड़क पर ये खड़े न हो इसके लिए ओवरब्रिज के नीचे पार्किंग का प्रबंध किया जाए। ओवरब्रिज के नीचे हो रहे अतिक्रमण से भी छुटकारा मिलेगा।
डीजल टेंपो से लगता था जाम
राजधानी में वाहनों को नियंत्रित करने की समृद्ध परंपरा रही है। 1990 के दशक में डीजल टेंपो से शहर में जाम लगता था, 1997 में सबसे पहले विधानसभा मार्ग पर इनका संचालन रोका गया था, विकल्प के रूप में सिटी बसें चलाई गई।
धीरे-धीरे मुख्य मार्गों से डीजल टेंपो हटे, शहर में आटो-टेंपो का परमिट 2008 में फ्रीज किया जा चुका है। अब टेंपो वही खरीद सकता है, जिसने पुराने टेंपो को समाप्त कर दिया हो। इसमें सभी विभागों ने मिलकर प्रयास किया था।
सख्ती से ई-रिक्शा की निगरानी हो
पूर्व अपर परिवहन आयुक्त ने कहा कि ऐसा ही प्रयास अब ई-रिक्शा को लेकर किया जाना चाहिए। 2022 में जिन 11 मार्गों पर ई-रिक्शा का संचालन प्रतिबंधित किया गया था, उनमें अधिकांश मार्ग मेट्रो के थे।
अब नए सिरे से उत्तर प्रदेश मोटर वाहन अधिनियम की धारा 178 के तहत प्रतिबंधित मार्गों की सूची जारी करने की जरूरत है, जगह-जगह प्रतिबंधित मार्ग के बोर्ड लगाए जाएं, साथ ही सख्ती से ई-रिक्शा की निगरानी हो।
मंत्रालय भी जनहित याचिका में पक्षकार
श्रीवास्तव ने बताया, डीसीपी ट्रैफिक इसकी नियमित निगरानी करेंगे। यातायात पुलिस व परिवहन की टास्क फोर्स बनाई गई है। इतना ही नहीं हाई कोर्ट ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भी जनहित याचिका में पक्षकार बनाया है, अगली सुनवाई में केंद्रीय मंत्रालय भी कोर्ट में ई-रिक्शा को लेकर अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करेगा।
संभव है कि परिवहन विभाग के पत्र के आधार पर केंद्रीय मोटरयान नियमावली में संशोधन करके पंजीकरण के साथ ई-रिक्शा को परमिट लेने की व्यवस्था शुरू हो जाए। यात्री वाहक ई-रिक्शा सामान ढो रहे हैं इस पर भी नियमित निगरानी से ही अंकुश लगेगा।
