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लखनऊ: रीढ़ की हड्डी में 5 ट्यूमर ने छीनी चलने फिरने की ताकत, 13 घंटे चली सर्जरी के बाद महिला को मिला जीवनदान

Published: Sun, 11 Oct 2026 07:42 AM (IST)

लखनऊ के कैंसर संस्थान में डॉक्टरों ने 27 वर्षीय महिला की रीढ़ की हड्डी से पांच ट्यूमर निकालने के लिए 13 घंटे की जटिल सर्जरी की।

कैंसर संस्थान में मरीज के साथ सर्जरी करने वाली डाक्टरों की टीम

कैंसर संस्थान में मरीज के साथ सर्जरी करने वाली डाक्टरों की टीम

HighLights

  1. रीढ़ की हड्डी में पांच ट्यूमर की जटिल सर्जरी।

  2. लखनऊ के कैंसर संस्थान में 13 घंटे चला ऑपरेशन।

  3. आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज, महिला को नया जीवन।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। रीढ़ की हड्डी में एक-दो नहीं, बल्कि पांच ट्यूमर होने के कारण तीन महीने से बिस्तर पर रहने को मजबूर महिला को चिकित्सकों ने जटिल सर्जरी के जरिए नया जीवन दिया है। चकित कर देने वाले इस मामले में कैंसर संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने मरीज का दो चरणों में ऑपरेशन किया।

पहली सर्जरी में करीब सात घंटे और दूसरे में छह घंटे लगे। लंबी और चुनौतीपूर्ण सर्जरी के बाद रीढ़ की हड्डी में मौजूद पांचों ट्यूमर को पूरी तरह निकाल दिया गया। उपचार के बाद महिला की हालत में सुधार है और जल्द ही संस्थान से छुट्टी मिल सकती है।

न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष एवं सीएमएस डॉ. विजेंद्र कुमार के अनुसार, रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होने के कारण 27 वर्षीय महिला की स्थिति गंभीर हो गई थी। वह पिछले तीन महीने से बिस्तर पर थी। ऐसे मामलों में ट्यूमर की स्थिति, आकार और रीढ़ की हड्डी व उससे जुड़ी नसों पर पड़ने वाले दबाव के कारण सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन खर्च अधिक लगने के कारण इलाज मुश्किल हो गया था। किसी की सलाह पर परिवारजन संस्थान लेकर आए। जांच में रीढ़ की हड्डी में पांच ट्यूमर की पुष्टि हुई। सभी ट्यूमर नसों को दबा रहे थे, जिससे महिला की हाथों से नीचे तक शरीर सुन्न हो गया था।

चलने-फिरने में असमर्थता के चलते उसकी रोजमर्रा की जिंदगी कठिन हो गई थी। मरीज की गंभीर स्थिति और सर्जरी की जटिलता को देखते हुए हमने आपरेशन को दो चरणों में पूरा किया। पहले चरण में सात और दूसरे में छह घंटे लगे।

करीब 13 घंटे तक चली इस प्रक्रिया में रीढ़ की हड्डी में मौजूद पांचों ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटा दिया गया। रीढ़ की हड्डी के आसपास की नसों और तंत्रिका तंत्र को सुरक्षित रखते हुए आपरेशन करना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में सर्जरी के दौरान विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है।

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आयुष्मान योजना से मुफ्त हुआ इलाज

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वरुण विजय ने बताया कि महिला की सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त की गई। कारपोरेट अस्पतालों में इस तरह के जटिल आपरेशन पर करीब सात-आठ लाख रुपये खर्च आता। सर्जरी में डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. आशीष मिश्र, असीम रशीद और डॉ. अर्चना ने भी सहयोग किया।

यह सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन न्यूरोसर्जरी की टीम ने 13 घंटे की कड़ी मेहनत और तकनीक की मदद से इसे सफल बनाया। निश्चित तौर पर मरीज को जीवनदान मिला है। पूरी टीम को बधाई।

                            डॉ. एमएलबी भट्ट, निदेशक, कल्याल सिंह सुपर स्पेशलियटी कैंसर संस्थान