लखनऊ, जागरण संवाददाता। लखनऊ विकास प्राधिकरण (लविप्रा) में अब आवंटियों का उत्पीड़न बाबू नहीं कर सकेंगे। लविप्रा उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने टाइपिंग, रजिस्ट्री का आनलाइन अपलोड करने का काम मुफ्त कर दिया है। इसके एवज में अभी आवंटियों से हजारों रुपये बाबू व कंप्यूटर ऑपरेटर ले लिया करते थे। यह पैसा कागज, टाइपिंग के नाम पर वसूला जाता था। अब मात्र पांच सौ रुपये का चालान बैंक में जमा करना होगा और उसकी रसीद ही रजिस्ट्री में मद्दगार होगी। कोर्ट में रजिस्ट्री कराने वाले बाबू जो कोर्ट फीस के नाम पांच से दस हजार रुपये बढ़ाकर वसूल कर लेते थे और कोर्ट फीस की रसीद देने में आनाकानी करते थे, अब नहीं कर सकेंगे। क्योंकि आवंटी स्वयं अपने हाथों से कोर्ट फीस जमा करेगा और हाथों हाथ रसीद प्राप्त करेगा। इसके आदेश तत्काल प्रभाव से जारी कर दिए गए हैं। इस प्रकिया में अगर कोई रजिस्ट्री कराने वाला बाबू ढिलाई करता है या फिर आवंटी का उत्पीड़न तो शिकायत पर ऐसे बाबू पर कार्रवाई की बात कही गई है।

लविप्रा उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने संपत्ति अधिकारियों को इसके आदेश जारी कर दिए हैें। संपत्ति अधिकारी स्निगधा चतुर्वेदी ने बताया कि रजिस्ट्री फीस का पैसा सीधे प्राधिकरण के राजस्व में जाएगा। वहीं जो काम रजिस्ट्री कराने वाले बाबू अलग अलग कंप्यूटर ऑपरेटर से कराते थे, अब वही काम कम्प्यूटर ऑपरेटर रजिस्ट्री सेल का करेगा। रजिस्ट्री सेल में आउटसोर्सिंग से संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर की तैनाती के आदेश जारी कर दिए गए हैं। मुख्य अभियंता द्वारा इसकी तैनाती की जानी है। रजिस्ट्री होने के बाद एक प्रति रजिस्ट्री की कब्जा देने के लिए संबंधित अधिशासी अभियंता और आवंटी को उसी दिन भेजी जाएगी।

तीन साल पुरानी रजिस्ट्री भी आनलाइन होंगी : लविप्रा उपाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी ने निर्देश दिए हैं कि पिछले दो से तीन साल में जो रजिस्ट्री ऑनलाइन नहीं हुई है, उसका पूरा ब्योरा आनलाइन कराया जाएगा। संबंधित संपत्ति अधिकारी और योजना सहायक से इसका ब्योरा मांगा गया है। यह प्रकिया भी शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। अगर इसके बाद भी संबंधित योजना देख रहे अधिकारी व बाबू संपत्ति का ब्योरा आनलाइन नहीं कराते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Anurag Gupta