सर्दी की आहट के साथ बिगड़ी लखनऊ की हवा, AQI 250 पार; सेहत पर गहराते संकट से बढ़ी लोगों की चिंता
लखनऊ में सर्दी की शुरुआत के साथ हवा की गुणवत्ता बिगड़ गई है, कई इलाकों में AQI 225-250 के पार ...और पढ़ें

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HighLights
लखनऊ में AQI 225-250 के पार, प्रदूषण चिंताजनक।
संवेदनशील लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर का खतरा।
वाहन, निर्माण और धूल प्रदूषण के मुख्य कारण।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। सर्दी की आहट के बीच राजधानी की हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। शहर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 225 से 250 के बीच पहुंचने से प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है। हवा में प्रदूषक तत्वों की बढ़ती मात्रा लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है।
खासकर अस्थमा, सांस और हृदय रोगियों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम में बदलाव के साथ तापमान में गिरावट और हवा की गति कम होने पर वातावरण में प्रदूषक कणों का फैलाव प्रभावित होता है। ऐसे में वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, सड़कों की धूल और अन्य स्रोतों से प्रदूषक हवा में जमा होने लगते हैं।
हवा की गुणवत्ता पर बढ़ी चिंता
एक्यूआइ का स्तर 225 से 250 के बीच होना हवा की खराब स्थिति को दर्शाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मानकों के अनुसार, 201 से 300 के बीच एक्यूआई को 'खराब' श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। संवेदनशील लोगों में खांसी, गले में जलन, सांस फूलने और सीने में असहजता जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
गुरुवार को गोमतीनगर, हजरतगंज और अलीगंज जैसे पाश इलाके में भी एक्यूआइ का स्तर 200 से 225 दर्ज किया गया, जबकि जानकीपुरम, इंदिरानगर व आशियाना में 240 रहा। तालकटोरा में सर्वाधिक 248 पहुंच गया। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजय वर्मा का कहना है कि प्रदूषण का असर केवल पहले से बीमार लोगों तक सीमित नहीं रहता।
लंबे समय तक खराब हवा के संपर्क में रहने से स्वस्थ लोगों को भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपने क्षेत्र की वायु गुणवत्ता पर नजर रखें और प्रदूषण अधिक होने के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर रहने से बचें। खराब हवा के बीच खुले स्थानों में लंबे समय तक व्यायाम करने और तेज शारीरिक गतिविधियों से बचना जरूरी है। सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी या सीने में जकड़न होने पर डाक्टर की सलाह लें।
धूल और वाहनों का धुआं बढ़ा रहे परेशानी
राजधानी में वाहनों की बढ़ती संख्या, सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण स्थलों से निकलने वाले कण और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। सर्दियों की शुरुआत के साथ मौसम संबंधी परिस्थितियां भी प्रदूषण को प्रभावित करती हैं।
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यदि हवा की गति कम रहती है और वातावरण में प्रदूषकों का फैलाव सीमित होता है, तो कई प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सड़कों पर धूल को कम करना, निर्माण स्थलों पर निर्धारित नियमों का पालन कराना, कचरा जलाने पर रोक लगाना और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी करना महत्वपूर्ण है।
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वायु प्रदूषण की रोकथाम और शहर की हवा को सुधारने के लिए नगर निगम और संबंधित विभागों के सहयोग से विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें शहर के विभिन्न इलाकों में लगातार निरीक्षण कर रही हैं। निर्माण कार्यों के दौरान नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त नजर रखी जा रही है। सड़कों की धूल और कचरे से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए वार्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है। -जेपी मौर्य, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
