लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश में कम आय वर्ग के जरूरतमंद परिवारों का अपना घर का सपना पूरा हो सकेगा। अब लघु-मध्यम एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए ज्यादा से ज्यादा फ्लैट बनेंगे। फ्लैट सस्ते रहें इसके लिए भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के साथ ही विकासकर्ताओं को कई तरह की रियायतें मिलेंगी। इस संबंध में उत्तर प्रदेश में अफोर्डेबल हाउसिंग नीति के नए मानकों का शासनादेश जारी किया गया है।

आवास एवं शहरी नियोजन के प्रमुख सचिव दीपक कुमार की ओर से जारी शासनादेश आवास आयुक्त के अलावा सभी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के अध्यक्षों को भेजा गया है। आठ पेज के विस्तृत शासनादेश में कम आय वर्ग के जरूरतमंद परिवारों का अपना घर का सपना पूरा करने के लिए अधिक से अधिक और न्यूनतम कीमत के फ्लैट के निर्माण के लिए तमाम तरह की सहूलियतें देते हुए मानकों में छूट का जिक्र है। अब ऐसे मानक तय किए गए हैं जिससे विकासकर्ता (बिल्डर), कम जमीन पर ही ज्यादा और जल्दी अधिक से अधिक फ्लैट बना सकेंगे।

दरअसल, पूर्व की सपा सरकार द्वारा वर्ष 2014-15 में शुरू की गई समाजवादी आवास योजना के योगी सरकार में बंद होने के बाद से राज्य में किफायती फ्लैट बनाने में विकासकर्ता दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। अब तमाम रियायतों के साथ अफोर्डेबल हाउसिंग के नए सिरे से तय किए गए मानकों का शासनादेश जारी होने पर किफायती फ्लैट का तेजी से निर्माण करने के लिए विकासकर्ता आगे आने की उम्मीद जताई जा रही है।

अब 12 मीटर चौड़ी सड़क पर ही बिल्डर न्यूनतम दो हजार वर्गमीटर के भूखंड पर ही फ्लैट बना सकेंगे। कम जमीन पर ज्यादा फ्लैट बन सकें इसके लिए एफएआर (फ्लोर एरिया रेसियो) भी सड़क की चौड़ाई व क्षेत्र के अनुसार 2.25 तक रहेगा। डेन्सिटी (घनत्व) भी बढ़ाकर 800 फ्लैट प्रति हेक्टेयर तक की गई है। जनसंख्या घनत्व से मुक्त किए जाने से बिल्डर को बेसिक विकास शुल्क ही देना होगा।

75 वर्गमीटर से अधिक कार्पेट एरिया के फ्लैट बनाने पर उनकी कुल संख्या का 20 फीसद ईडब्ल्यूएस व एलआईजी फ्लैट भी बिल्डर को बनाने होंगे। रेरा में अनिवार्य रूप से परियोजना को पंजीकृत कराए जाने से 20 फीसद भूमि को बंधक रखने की शर्त से भी बिल्डर को छूट दे दी गई है। तीन हजार वर्गमीटर की भूमि पर रो हाउसिंग भी की जा सकेगी।

न्यूनतम दो कमरे व बालकनी होगी जरूरी : अफोर्डेबल नीति के तहत न्यूनतम 25 वर्गमीटर से अधिकतम 90 वर्गमीटर कारपेट एरिया के फ्लैट बनाए जाएंगे। इनमें न्यूनतम दो कमरे, रसोईघर, स्नानघर, शौचालय व बालकनी की सुविधा रहेगी। कमरे का न्यूनतम क्षेत्रफल 6.50 व नौ वर्गमीटर रहेगा। छोटे फ्लैट में एक मोटर साइकिल व बड़े में एक कार पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। भूखंड होने की दशा में उनका क्षेत्रफल 30 वर्गमीटर से अधिकतम 150 वर्गमीटर होगा।

Edited By: Umesh Tiwari