लखनऊ, जेएनएन। हॉस्पिटल में संक्रमण से बचाव के लिए भारी भरकम टीम बनी हुई है। बावजूद इसके डॉक्टर कोरोना के संक्रमण की चपेट में आ गया। ऐसे में इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।

दरअसल, केजीएमयू में हॉस्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी (एचआइसीसी) बनी है। इसमें 20 के करीब सदस्य हैं। कमेटी की जिम्मेदारी अस्पताल में मरीजों, डॉक्टरों व स्टाफ को संक्रमण से बचाव करना है। इलाज के दौरान एक-दूसरे में वायरस का ट्रांसमिशन न हो इसके लिए ट्रीटमेंट सिक्योरिटी प्रोटोकॉल बनाना, प्रशिक्षण देने के साथ ही गाइडलाइन को लागू करना है। इसके अलावा वार्ड, यूनिट के उपकरणों व चैंबर की सैंपलिंग कर समय-समय पर विसंक्रमित करना है। कैंपस में चर्चा है कि कोरोना वार्ड के गठन के बाद इंफेक्शन कंट्रोल टीम ने मॉनीटङ्क्षरग में लापरवाही की। ऐसे में जूनियर डॉक्टर तक वायरस का प्रसार हो गया।

हाई सिक्योरिटी किट, फिर भी संक्रमण

कोरोना वार्ड में प्रवेश करने से पहले डॉक्टर-स्टाफ चेंजिंग रूम में जाता है। यहां पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट किट (पीपीई) पहनता है। इसमें वायरस से सुरक्षित करने वाला एप्रेन, गॉगल, हेड कैप, मास्क, ग्लब्स, स्पेशल शूज होते हैं, जिन्हें पहनकर डॉक्टर, स्टाफ आइसोलेशन वार्ड में इंट्री करता है। वहीं वापस आने पर किट को डिस्पोज कर दिया जाता है। हर बार नई किट पहनने का नियम है। ऐसे में किट उतारने में लापरवाही भी वायरस की चपेट में आने का खतरा रहता है। चर्चा है कि समय-समय पर इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी मॉनीटङ्क्षरग कर स्टाफ को दिशा-निर्देश देती तो चिकित्सक से संक्रमण का खतरा टाला जाता सकता था।

केजीएमयू के प्रवक्ता, डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि  सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। बावजूद इसके जहां पर भी कमियां होंगी, उन्हें दूर किया जाएगा। 

Posted By: Anurag Gupta

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