लखनऊ में जिंदगी की सबसे बड़ी जंग जीत गया 7 साल का मासूम, KGMU ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों ने किया कमाल
केजीएमयू ट्रामा सेंटर में सात साल के बच्चे ने गंभीर निमोनिया और सेप्टिक शॉक से जंग जीती। 14 दिन वेंटिलेटर ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
सात साल का बच्चा गंभीर निमोनिया और सेप्टिक शॉक से पीड़ित था।
केजीएमयू ट्रामा सेंटर में 14 दिन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहा।
डॉक्टरों की विशेष टीम ने बच्चे की जान बचाई, घर लौटा।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। निमोनिया और सेप्टिक शाक से ग्रसित सात साल के बच्चे को बेहद गंभीर हालत में केजीएमयू के ट्रामा सेंटर लाया गया, जहां बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर नियमित निगरानी के लिए विशेष टीम बनाई गई। 14 दिन वेंटिलेटर पर बिताने के बाद बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार हुआ और 22 दिन के बाद बच्चा ठीक होकर घर लौटा।
ट्रामा सेंटर के प्रभारी प्रो. प्रेमराज सिंह के अनुसार, गिलियन-बैरे सिंड्रोम, गंभीर निमोनिया और सेप्टिक शाक से जूझ रहे सात साल के बच्चे को समय पर सही उपचार मिलने से उसकी जान बचाई जा सकी। प्रयागराज से बेहद गंभीर हालत में ट्रामा सेंटर लाया गया था। बच्चे को पीडियाट्रिक आईसीयू में बेड नहीं मिला। ऐसे में ट्रामा क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती कर तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी थी। सेप्टिक शाक की वजह से उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। डाक्टरों की टीम ने जरूरी दवाओं और निगरानी से इलाज जारी रखा। धीरे-धीरे बच्चे की हालत में सुधार हुआ। इसके बाद उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटाया गया।
रिहैबिलिटेशन और अन्य जरूरी देखभाल के बाद वह चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियों के लिए स्वस्थ होने लगा। ट्रामा क्रिटिकल केयर यूनिट प्रभारी डॉ. जिया अरशद की देखरेख में डा. राम गोपाल मौर्य और टीम ने इलाज किया। ट्रामा क्रिटिकल केयर यूनिट गंभीर मरीजों को तत्काल जीवनरक्षक इलाज उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
