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सीओ जियाउल हक हत्याकांड: राजा भैया को बड़ी राहत, सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट अदालत में मंजूर

Published: Sun, 20 Sep 2026 12:21 AM (IST)

सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में सीबीआई की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सीबीआई ने सीओ जियाउल हक हत्याकांड में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।

  2. अदालत ने रघुराज प्रताप सिंह समेत पांच लोगों को राहत दी।

  3. परवीन आजाद ने पहले सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया था।

विधि संवाददाता, लखनऊ। चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) लखनऊ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है।

यह मुकदमा सीओ की पत्नी परवीन आजाद की ओर से तीन मार्च 2013 को दर्ज कराया गया था। दोबारा विवेचना के बाद सीबीआई ने 22 दिसंबर, 2023 को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद इसे स्वीकार करने का आदेश दिया। इससे कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह समेत पांच लोगों को राहत मिल गई है।

यह था मामला

अभियोजन पत्रावली के मुताबिक, दो मार्च 2013 की शाम करीब साढ़े सात बजे जमीन विवाद को लेकर प्रतापगढ़ के कुंडा के बलीपुर गांव के प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना की जानकारी पर उनके समर्थक गांव पहुंचे और आरोपित के घर में आग लगा दी।

स्थिति बिगड़ने की सूचना पर तत्कालीन सीओ कुंडा जियाउल हक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान सीओ और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई। इसी दौरान प्रधान के भाई सुरेश यादव की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद उग्र भीड़ ने सीओ जियाउल हक को घेरकर उनकी पिटाई की और गोली मारकर हत्या कर दी।

चार एफआईआर दर्ज हुई

तिहरे हत्याकांड से संबंधित चार एफआईआर दर्ज हुई थीं। इनमें पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे के अलावा प्रधान नन्हे यादव और सुरेश यादव की हत्या से संबंधित मामले शामिल थे। सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने चौथी एफआईआर में तत्कालीन कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह समेत पांच लोगों को नामजद किया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने इस मामले में 31 जुलाई 2013 को पहली क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। परवीन आजाद ने इसका विरोध करते हुए प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। अदालत के आठ जुलाई 2014 के आदेश के बाद मामले में दोबारा विवेचना की गई।

इसके बाद सीबीआई ने 22 दिसंबर 2023 को फिर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। अब अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया है। इस बीच जियाउल हक हत्याकांड के अन्य आरोपितों के खिलाफ चली सुनवाई में अक्टूबर 2024 में 10 आरोपितों को दोषी ठहराया गया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।