KGMU में 'लव ट्रैप' और मतांतरण का खेल, STF की जांच में सीनियर डॉक्टरों और स्टाफ की भूमिका उजागर; 12 पर लटकी तलवार
एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू में मतांतरण और यौन शोषण के मामले में पांच डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की सीधी ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
एसटीएफ रिपोर्ट में 12 केजीएमयू कर्मियों पर आरोप।
डॉ. रमीज मुख्य आरोपी, मतांतरण व शोषण का आरोप।
केजीएमयू प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठे।
जागरण टीम, लखनऊ। एसटीएफ ने मतांतरण और यौन शोषण के संबंध में शासन को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें केजीएमयू के डॉ. रमीज उर्फ रमीजुद्दीन सहित पांच डाक्टरों व नर्सिंग स्टाफ की प्रत्यक्ष भूमिका का उल्लेख है, जबकि सात अन्य को उन्हें शह व संरक्षण देने का आरोपित माना है। इसमें सीनियर रेजिडेंट डॉ. रमीज मुख्य आरोपी है।
इस पर जूनियर महिला डाक्टर को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करने, धर्म परिवर्तन के लिए मारपीट करने और अन्य हिंदू महिला डाक्टरों को निशाना बनाने का आरोप है। यह इस समय जेल में है। डॉ. रमीज के अलावा नर्सिंग स्टाफ नफीस और फुरकान पर गांधी वार्ड में तैनात दो नर्सिंग कर्मियों को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक/मानसिक शोषण करना और मतांतरण कराकर निकाह करने का आरोप है।
माइक्रोबायोलाजी विभाग में तैनात संविदा कर्मी शफात अली खान पर 25 वर्षीय हिंदू कंप्यूटर आपरेटर युवती से छेड़छाड़, उसका पीछा करने और मतांतरण कर निकाह के लिए दबाव बनाने का आरोप है। इसी तरह रेजिडेंट डा आदिल पर गांधी वार्ड की दो नर्सिंग स्टाफ पर शादी का झांसा देकर प्रेमजाल में फंसाने और शारीरिक शोषण का आरोप है।
वहीं, जिन सात लोगों पर नेटवर्क को संरक्षण देने और पीड़ितों को प्रताड़ित करने का आरोप है उसमें पैथोलाजी के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश बाबू को लेकर कहा गया है कि वे डॉ. रमीज को विभागीय मीटिंगों में क्लीनचिट देते रहे। पीड़िता पर विक्षिप्त होने का झूठा आरोप लगाकर मामले को दबाने और हिंदू विरोधी मानसिकता रखने का आरोप है।
कट्टर इस्लामिक विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप
पैथोलाजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुगायरा कयूम पर आरोप है कि वे मुस्लिम रेजिडेंट्स को संरक्षण देती थीं व हिंदू डाक्टरों को प्रताड़ित कर भेदभाव करती रहीं। पैथोलाजी के ही लैब इंचार्ज डॉ. वाहिद अली पर आरोप है कि वे लैब में मुस्लिम लड़कों के साथ बैठकें करते थे। साथ ही उन पर डॉ. रमीज को संरक्षण देने और कट्टर इस्लामिक विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप है। मेडिसिन विभाग में नेफ्रोलाजिस्ट प्रो. उस्मान कौसर इस समूह का नेतृत्व करते और धर्मांतरण से जुड़े मामलों में सहयोग करते थे।
इनसे पहले यह काम क्लर्क एस. ए. अब्बास करता था। बायोकेमिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अहमद व डॉ. कलीम मुस्लिम स्कालर्स और रेजिडेंट्स को इस नेटवर्क में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के साथ वित्तीय सहयोग भी देते थे। इनके अलावा रिपोर्ट में 'इस्लामिक मेडिकोज' ग्रुप से जुड़े डॉ. परवेज, डॉ. शाहीन और मो. कैफ जैसे डाक्टरों के नाम भी संदिग्धों और सहयोगियों के रूप में दर्ज हैं, जिनके तार बाहरी संगठनों से जुड़े होने की बात कही गई है।
एसटीएफ की रिपोर्ट पर केजीएमयू की कार्रवाई पर टिकीं निगाहें केजीएमयू में मतांतरण और महिला डाक्टरों-कर्मचारियों के उत्पीड़न से जुड़े प्रकरण में एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में मुख्य आरोपित जूनियर रेजिडेंट रमीजुद्दीन के विरुद्ध बार-बार लिखित शिकायतें मिलने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम न उठाया जाना सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संस्थान में इस तरह की शिकायतें सामने आ रही थीं, तो समय रहते उनका निस्तारण क्यों नहीं किया गया?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केजीएमयू प्रशासन एसटीएफ की रिपोर्ट पर पहले की गई कार्रवाई का क्या ब्योरा देता है और आगे की जांच में किन तथ्यों की पुष्टि होती है?। देश-दुनिया में केजीएमयू के डाक्टरों की साख है और वे खुद को जार्जियन कहने में गर्व महसूस करते हैं।
केजीएमयू के पूर्व छात्रों का कहना है कि डॉ. रमीज उर्फ रमीजुद्दीन के खिलाफ शिकायतों को शुरुआत में नजरअंदाज किया गया। विभागाध्यक्ष भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। केजीएमयू के पूर्व सीनियर रेजिडेंट डॉ. शिवम कृष्णन ने कहा, यदि हम लोगों ने विरोध प्रदर्शन नहीं किए होते तो इतना गंभीर प्रकरण दब जाता।
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एसटीएफ की जांच से साफ हो गया है कि संस्थान प्रशासन की मनमानी के चलते देश के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान में मतांतरण जैसा गंभीर कृत्य हो रहा था। डॉ. भूपेंद्र सिंह का कहना है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच संस्थान की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण है।
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