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6 हजार का लेंस बाहर से 18 हजार में मंगवाया, केजीएमयू में डॉक्टरों का कमीशन खेल उजागर

Published: Wed, 03 Jun 2026 10:44 AM (IST)

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में डॉक्टरों द्वारा मरीजों को निजी दुकानों से महंगी दवाएं और लेंस खरीदने के लिए मजबूर करने का मामला सामने आया है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी।

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संक्षेप में पढ़ें

विकास मिश्र, लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में हास्पिटल रिवाल्विंग फंड (एचआरएफ) के तहत फार्मेसी का संचालन होता है, लेकिन इसके बावजूद मरीजों से निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं और इंट्राआक्यूलर लेंस (आइओएल) मंगवाए जा रहे थे।

नेत्र रोग विभाग में डाक्टरों और निजी वेंडरों के बीच कमीशन के खेल का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें छह हजार के लेंस को बाहर से 18 हजार रुपये में मंगवाया गया। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद द्वारा गठित चार सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट में विभाग के एक सीनियर प्रोफेसर और उनके सहायक के खिलाफ लगे सभी आरोप सही पाए गए हैं।

खास बात यह है कि डाक्टर का सहायक संस्थान में न नियमित कर्मचारी है और न ही संविदाकर्मी। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति को डाक्टर की ओपीडी में बैठने और दवा लिखने की अनुमति किसने दी?

रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग के डाक्टर निजी सहायक के जरिये मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं और लेंस खरीदने के लिए मजबूर कर रहे थे। कमेटी ने मंगलवार को जांच रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी है, जिसके आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कानूनी और विभागीय कार्रवाई के विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है।

17 मरीजों ने दिए निजी फार्मेसी से दवा-लेंस मंगवाने के साक्ष्य

केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक, गोरखपुर के एक मरीज ने इस मामले में मुख्यमंत्री पोर्टल और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से शिकायत की थी।

पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने गोरखपुर जाकर पीड़ितों के बयान दर्ज किए। इस मामले समेत 30 मरीजों में से 17 ने जांच कमेटी को अपने बयान में बाहर से दवा, लेंस और अन्य उपकरण मंगवाने के साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं।

लंबे समय से चल रहा था कमीशन का खेल

नेत्र रोग विभाग में यह खेल लंबे समय से चल रहा था। यदि गोरखपुर के रोगी की तरफ से शिकायत न की गई होती तो शायद इस मामले से पर्दा अभी नहीं उठता। मरीजों की सर्जरी में उपयोग होने वाले लेंस एवं दवाएं एचआरएफ की फार्मेसी पर 50-80 प्रतिशत छूट में उपलब्ध हैं, लेकिन कमीशन के खेल के चलते रोगियों को निजी मेडिकल स्टोर भेजा जा रहा था।

गोरखपुर के जिस मरीज के लिए करीब 18,000 रुपये की दवाएं-लेंस बाहर से मंगवाई गईं, वही केजीएमयू की फार्मेसी में छह से सात हजार रुपये में मिलती हैं। शुरुआत में एक-दो मरीजों की शिकायत को नजरअंदाज भी किया गया, लेकिन इसकी संख्या बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की थी।

मरीजों के हितों से जुड़े किसी भी मामले में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संस्थान में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।

-प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू

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