25 साल बाद लखनऊ खंडपीठ से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले दूसरे जज होंगे न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय, नियुक्ति की हुई सिफारिश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है, क्योंकि न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के इतिहास में सोमवार को एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने की सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने अनुशंसा की है। नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने पर वह लखनऊ खंडपीठ से सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले दूसरे न्यायाधीश होंगे। उनसे पहले न्यायमूर्ति बृजेश कुमार वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने थे। न्यायमूर्ति उपाध्याय का पूरा न्यायिक और विधिक करियर लखनऊ से जुड़ा रहा है।
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1991 में वकालत शुरू की। उन्होंने लखनऊ खंडपीठ में सिविल और संवैधानिक मामलों की पैरवी की अरौर वरिष्ठ अधिवक्ताओं मोहम्मद आरिफ खान व एसके कालिया के साथ भी कार्य किया। मई 2007 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य स्थायी अधिवक्ता नियुक्त किया गया। 21 नवंबर 2011 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
न्यायमूर्ति उपाध्याय ने लखनऊ खंडपीठ में 11 वर्ष से अधिक समय तक न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। 28 मार्च 2023 को वह लखनऊ खंडपीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश बने। इसके बाद 29 जुलाई 2023 को बांबे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। जनवरी 2025 में उनका स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुआ।
न्यायमूर्ति उपाध्याय के साथ गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह को भी सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाए जाने की अनुशंसा की गई है।
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