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जौहर यूनिवर्सिटी: 426 करोड़ की संपत्ति कुर्की के बाद चंदे-खर्च की जांच तेज, आजम खान के करीबियों पर गिरफ्तारी की तलवार

Published: Fri, 30 Oct 2026 01:45 AM (IST)

जौहर विश्वविद्यालय की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क होने के बाद ईडी ने चंदे और निर्माण खर्च में अनियमितताओं ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जौहर विश्वविद्यालय की 426.46 करोड़ की संपत्ति कुर्क।

  2. चंदे और निर्माण खर्च में अनियमितताओं की जांच तेज।

  3. आजम खान के करीबियों की गिरफ्तारी की संभावना।

आदित्य तिवारी,मलखनऊ। जौहर विश्वविद्यालय की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क करने के बाद अब ट्रस्ट को मिले डोनेशन और निर्माण पर खर्च हुई रकम के हिसाब-किताब में अनियमितताओं की परतें सामने आ सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज एफआइआर में उपलब्ध कराए गए साक्ष्य और वित्तीय लेनदेन के दस्तावेजों के आधार पर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और आजम खां के करीबियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

जांच में चंदे की रकम के स्रोत, उसके इस्तेमाल और निर्माण कार्यों में संबंधित लोगों की भूमिका सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अब पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आजम खां के करीबियों की गिरफ्तारी भी संभव है।

ईडी के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर की जमीन और 59 भवनों की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि वैध स्रोतों से 72.63 करोड़ रुपये के खर्च का ही हिसाब मिल सका। इस तरह 426.46 करोड़ रुपये के खर्च का स्रोत स्पष्ट नहीं होने पर एजेंसी ने संबंधित संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये बताया गया है। अब जांच में ट्रस्ट को मिले डोनेशन, बैंक खातों में हुए लेनदेन और निर्माण पर खर्च की गई रकम का मिलान महत्वपूर्ण होगा।

भूमिका की बढ़ाई पड़ताल 

आजम खां से 12 अक्टूबर को रामपुर जेल में पूछताछ के बाद ईडी की शिकायत पर 13 अक्टूबर को अजीमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस की विवेचना में एजेंसी से मिले दस्तावेजों और बयानों के आधार पर संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल बढ़ा दी है।

जांच का एक महत्वपूर्ण सिरा करीब 186 करोड़ रुपये के लोक निर्माण विभाग के ठेकों से भी जुड़ा है। ईडी से संबंधित कंपनी के प्रबंध निदेशक ने बयान में ठेका राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किए जाने की बात कही थी।

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इसके अलावा स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से करीब 6.60 करोड़ रुपये के कार्य और जल निगम के माध्यम से कराए गए निर्माण भी जांच के दायरे में हैं। जांच में ट्रस्ट के पदाधिकारियों, ठेकेदारों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका सामने आने पर पूछताछ के साथ गिरफ्तारी समेत अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।