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जौहर यूनिवर्सिटी की परतें खोल रही ईडी, ट्रस्ट के चंदे और निर्माण खर्च को लेकर कुलपति से आठ घंटे पूछताछ

Published: Fri, 25 Sep 2026 08:28 PM (IST)

ईडी ने जौहर विश्वविद्यालय और जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की जांच तेज कर दी है। धन शोधन मामले में कुलपति प्रो. जहीरुद्दीन से आठ घंटे पूछताछ की गई।

जौहर यूनिवर्सिटी की परतें खोल रही ईडी।

जौहर यूनिवर्सिटी की परतें खोल रही ईडी।

HighLights

  1. ईडी ने जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति से आठ घंटे पूछताछ की।

  2. धन शोधन मामले में ट्रस्ट के चंदे, निर्माण खर्च की जांच।

  3. सरकारी ठेकेदारों और शेल कंपनियों से लेनदेन पर भी सवाल।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के महासचिव मोहम्मद आजम खां से जुड़े जौहर विश्वविद्यालय और जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की जांच अब विश्वविद्यालय के अधिकारियों से पूछताछ तक पहुंच गई है। धन शोधन (मनी लांड्रिंग) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जहीरुद्दीन से करीब आठ घंटे पूछताछ की।

लखनऊ स्थित ईडी कार्यालय में हुई पूछताछ के दौरान ट्रस्ट को मिले चंदे, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च, सरकारी ठेकेदारों से जुड़े लेनदेन और धन के स्रोत से संबंधित सवाल किए गए।

कुलपति से उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली गई। उनसे पूछा गया कि किस योग्यता के आधार पर अब्दुल्ला आजम को विश्वविद्यालय का प्रति कुलपति नियुक्त किया गया। इससे संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।

सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम कथित तौर पर शेल कंपनियों के जरिये ट्रस्ट में लाने और इसके बाद विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों में लगाए जाने के पहलू पर भी सवाल किए गए।

ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच हुए वित्तीय लेनदेन तथा धन के स्रोत से जुड़े दस्तावेज भी कुलपति से मांगे गए। पूछताछ में यह जानने का प्रयास किया गया कि विश्वविद्यालय आने वाले ठेकेदारों और कंपनियों के मालिकों में से वह कितने लोगों को जानते हैं और उनके माध्यम से कितने लोगों ने धनराशि हस्तांतरित कराई। ईडी ने अगस्त में रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में विश्वविद्यालय व जौहर ट्रस्ट से जुड़े 10 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

रामपुर स्थित विश्वविद्यालय और ट्रस्ट कार्यालय में करीब 16 घंटे तक दस्तावेजों और डिजिटल रिकार्ड की जांच की गई थी। इस दौरान हार्ड डिस्क समेत कई अभिलेख कब्जे में लिए गए थे। इनमें विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और ट्रस्ट को मिले चंदे से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हैं।

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