क्रेडिट कार्ड और ज्वेलरी खरीद के नकद भुगतान पर आयकर विभाग की पैनी नजर; बैंकों से मांगी 6 महीने की रिपोर्ट
आयकर विभाग क्रेडिट कार्ड के एक लाख से अधिक के नकद भुगतानों और ज्वेलरी खरीद पर पैनी नजर रख रहा ...और पढ़ें

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HighLights
क्रेडिट कार्ड बिल के एक लाख से अधिक नकद भुगतान पर निगरानी।
ज्वेलरी खरीद में दो लाख से अधिक नकद लेनदेन पर नजर।
आयकर विभाग ने बैंकों से 6 महीने की वित्तीय रिपोर्ट मांगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। क्रेडिट कार्ड के एक लाख रुपये से अधिक के बिल का नकद भुगतान करने वाले आयकर विभाग की पैनी नजर में हैं। क्रेडिट कार्ड का कैश में ज्यादा भुगतान करने वाले मुश्किल में पड़ सकते हैं।
आयकर विभाग के इंटेलिजेंस एवं आपराधिक अन्वेषण निदेशालय की लखनऊ यूनिट ने ऐसा लगातार भुगतान करने वालों की बैंकों और संबंधित संस्थानों से पिछले छह माह के वित्तीय लेन-देन की रिपोर्ट मांगी है। संस्थानों को अक्टूबर के अंत तक रिपोर्ट उपलब्ध करानी है। इसके आधार पर आयकर रिटर्न में दर्ज आय और वास्तविक वित्तीय लेन-देन का मिलान किया जाएगा।
संयुक्त निदेशक सोनल सिंह के अनुसार, इसका उद्देश्य कर चोरी और वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी की पहचान करना है। यदि किसी व्यक्ति के आयकर रिटर्न में दर्ज आय और उसके खर्च या निवेश में अंतर मिलता है तो विभाग इसकी जांच कर सकता है।
भुगतान की जानकारी भी देना अनिवार्य
उप निदेशक संदीप सिंह के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति शोरूम से डेढ़ लाख रुपये का टीवी, रेफ्रिजरेटर या फर्नीचर खरीदता है और इसमें एक लाख रुपये नकद देता है तो संबंधित संस्थान को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी। क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये से अधिक के भुगतान की जानकारी भी संबंधित संस्था को विभाग को देना अनिवार्य है।
बैंक खातों में मिलने वाले ब्याज, म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार और सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआइपी) में निवेश से जुड़ी जानकारी भी विभाग को मिल रही है। जीवन बीमा पालिसियों के बड़े प्रीमियम और अन्य वित्तीय लेन-देन का ब्योरा भी निगरानी के दायरे में है।
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इन सूचनाओं के जरिए विभाग करदाताओं की घोषित आय और उनके वित्तीय व्यवहार का मिलान कर रहा है। आभूषण की खरीद में दो लाख रुपये या इससे अधिक के नकद भुगतान की जानकारी भी आयकर विभाग तक पहुंचाने का प्रविधान है। इसके अलावा संपत्ति की खरीद-फरोख्त से जुड़े लेन-देन की रिपोर्टिंग भी तय नियमों के तहत की जाती है।
