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नोएडा और वाराणसी के कमिश्नर का हटना तय, लखनऊ व कानपुर के पुलिस अफसरों की बदलेगी कुर्सी

Published: Thu, 05 Nov 2026 05:00 AM (IST)

IPS Transfer in UP: गृह जनपद में तैनाती, पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में निभाई गई जिम्मेदारी तथा चुनाव संबंधी शिकायतों को भी आधार बनाया जाएगा।

नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह -- वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल

नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह -- वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल

HighLights

  1. विधानसभा चुनाव 2027 से पहले तीन वर्ष से एक जिले में तैनात 15 आईपीएस समेत 250 संख्या का रिकार्ड अभी तक आया सामने

  2. सरकार को 15 नवंबर तक पूरी करनी होगी प्रक्रिया, रूटीन तबादलों के जरिए भी पहले से शुरू हो सकती है पुलिसकर्मियों की दूसरे जिलों में रवानगी

आदित्य तिवारी, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस में बड़े फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग के तीन वर्ष से एक जिले में तैनाती के मानक के तहत नोएडा और वाराणसी के पुलिस कमिश्नर समेत लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, आगरा, मेरठ और गाजियाबाद जैसे बड़े जिलों में तैनात वरिष्ठ अधिकारियों की कुर्सी बदल सकती है।

डीजीपी मुख्यालय के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती में अब तक 15 आइपीएस समेत 250 पुलिस कर्मी का रिकार्ड अभी तक सामने आया है। इस बार समीक्षा का दायरा आईपीएस अधिकारियों से लेकर एएसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर, दारोगा और अन्य पुलिसकर्मियों तक रखा गया है।

संभावना है कि निर्वाचन आयोग के औपचारिक निर्देशों से पहले ही शासन रूटीन प्रशासनिक तबादलों के जरिए तीन साल से अधिक समय से एक जिले में तैनात पुलिसकर्मियों को दूसरे जिलों में भेजना शुरू कर दे।
नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह नवंबर 2022 से गौतमबुद्धनगर की कमान संभाल रही हैं, जबकि वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल मार्च 2024 में तैनात हुए थे। निर्वाचन आयोग की निर्धारित कटआफ 31 मई 2027 तक दोनों का संबंधित जिले में तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल होगा।

ऐसे में दोनों कमिश्नरेट के प्रमुखों की तैनाती भी समीक्षा के दायरे में आएगी। लखनऊ और कानपुर समेत अन्य जिलों में लंबे समय से तैनात पुलिस कप्तानों और वरिष्ठ अधिकारियों का रिकार्ड भी खंगाला जा रहा है। डीजीपी मुख्यालय की स्थापना शाखा ने 29 अक्टूबर को सभी जोनल एडीजी और पुलिस आयुक्तों को पत्र भेजकर 15 नवंबर तक समीक्षा, स्थानांतरण और समायोजन की प्रक्रिया पूरी कर प्रमाणपत्र देने का निर्देश दिया है।

विधानसभा चुनाव 2022 से पहले भी पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल हुए थे। अक्टूबर 2021 में एक ही आदेश से 29 इंस्पेक्टर और 185 दारोगा समेत 214 पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए थे। इसी दौरान 35 पीपीएस अधिकारियों को तीन साल से अधिक की तैनाती के आधार पर चिह्नित किया गया था।

इसके अलावा अलग-अलग आदेशों में आईपीएस और पीपीएस अधिकारियों के भी तबादले हुए थे। इस बार की तैयारी का दायरा अधिक व्यापक है। समीक्षा में पदोन्नति के बाद उसी जिले में मिली नई जिम्मेदारी की अवधि ही नहीं, बल्कि पदोन्नति से पहले की तैनाती भी जोड़ी जाएगी।

गृह जनपद में तैनाती, पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में निभाई गई जिम्मेदारी तथा चुनाव संबंधी शिकायतों को भी आधार बनाया जाएगा। निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों को दूसरे जिले अथवा पुलिस सब डिवीजन में समायोजित करने की तैयारी है। ऐसे में चुनाव से काफी पहले ही पुलिस महकमे में तबादलों का दौर शुरू हो सकता है।

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