लखनऊ (जेएनएन)।  आइपीएस सुरेंद्र दास का सोमवार को राजकीय सम्मान के साथ वैकुंठधाम (भैंसाकुंड) पर अंतिम संस्कार हुआ। बड़े भाई नरेंद्र दास ने मुखाग्नि दी। सुरेंद्र की पत्नी डॉक्टर रवीना भी पति का अंतिम दर्शन करने वैकुंठधाम पहुंची।
सुरेंद्र का शव रविवार रात से ही पीजीआइ क्षेत्र के एकता नगर स्थित उनके आवास पर रखा गया था। सैकड़ों की संख्या में लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। सोमवार तड़के सुरेंद्र के मूल निवास बलिया के भरौली गांव से उनके परिवारीजन और ग्रामीण राजधानी पहुंचे। सुबह करीब 11 बजे पुलिस व परिवारीजन शव लेकर भैंसा कुंड पहुंचे। अंतिम दर्शन के लिए शव को वहां रखा गया। इस दौरान डीजीपी ओपी सिंह समेत विभाग के तमाम आलाधिकारियों ने सुरेंद्र को श्रद्धांजलि अर्पित की।

पुलिस के जवानों ने सलामी दी, जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। इससे पूर्व सुरेंद्र की पत्नी अपने पिता डॉ. रमेंद्र सिंह व अन्य परिवारीजन के साथ वहां पहुंची। पति के पार्थिव शरीर से वह लिपटकर चीखने लगीं। किसी तरह उन्हें वहां से थोड़ी दूर ले जाया गया। हालांकि रवीना के जिद करने पर परिवारीजन एक बार अंतिम दर्शन कराकर उन्हें वहां से लेकर चले गए। पति की मौत से रवीना का रो-रोकर बुरा हाल था।

मंत्री ने भी दी श्रद्धांजलि : मूलरूप से बलिया निवासी आइपीएस सुरेंद्र को श्रद्धांजलि देने मंत्री उपेंद्र तिवारी, डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल व भाजपा नेता दयाशंकर सिंह समेत अन्य लोग भी भैंसा कुंड पहुंचे। इस दौरान सभी ने पीडि़त परिवार को सांत्वना दी। मंत्री उपेंद्र तिवारी ने कहा कि इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सरकार पीडि़त परिवार के साथ है। सुरेंद्र के परिवार को हर संभव मदद की जाएगी।
 

सुरेंद्र का सपना था कानपुर में बड़ा अस्पताल खोलें

कानपुर में तैनाती के दौरान सुरेंद्र दास का सपना कानपुर में एक बड़ा अस्पताल खोलने का था। इसके लिए वह परिवार के लोगों के बीच सहमति बना रहे थे। इसी कारण ही पत्नी डॉ. रवीना भी अम्बेडकर नगर मेडिकल कॉलेज छोड़कर कानपुर आ गई थी। ऐसी चर्चा पत्नी के साथ मेडिकल कॉलेज में पढ़े छात्रों और शिक्षकों के बीच चल रही है।

एक शिक्षक ने नाम नहीं छापने की शर्त करने पर बताया कि सुरेंद्र दास मेडिकल कॉलेज आया करते थे। उनका मानना था कि एक डॉक्टर को स्वतंत्र तौर पर काम करना चाहिए। बंदिश से रचनात्मक प्रतिभा नहीं दिखती है। वैसे डॉक्टरी पेशे से वह काफी खुश थे। खासतौर से एनॉटामी विभाग जिसमें उनकी पत्नी एमएस कर रही थीं उससे उन्हें बड़ा लगाव था।

वह खुद अपनी शादी का निमंत्रण देने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज आए थे। यहां के मेडिकल कॉलेज के लगभग 50 फीसदी शिक्षक और कर्मचारी शादी में शामिल हुए थे। शादी के बाद भी जब तक उनकी पत्नी यहां पढ़ रही थी वह यहां आया करते थे। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसा लगता था कि सुरेंद्र यहां के छात्र हैं। तभी शादी में सभी लोग गए। वह कहा करते थे घबराओ नही एक अस्पताल खोलेंगे उसमें सभी लोग मिलकर काम करेंगे।

डॉ. रवीना के साथ खुद शादी की खरीदारी की

सुरेंद्र दास ने शादी की खरीदारी रवीना के साथ मिलकर लखनऊ में की थी। डॉ. रवीना की पसंद से कपड़े और दूसरे सामान खरीदे गए थे। एक जूनियर डॉक्टर का कहना है कि सुरेंद्र दास की मां चाहती थीं कि किसी तरह की कोई शिकायत नहीं हो इसलिए पूरी खरीदारी होने वाली बहू करे। अक्सर शादी से पहले डॉ. रवीना लखनऊ जाती थीं और मां के साथ मिलकर खरीदारी करती थीं। 

Posted By: Dharmendra Pandey