लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। बारिश न होने से धान सूखने को लेकर किसान परेशान हैं तो कृषि माैसम वैज्ञानिकों ने 15 तक बारिश की संभावना जता कर आशा की किरण दिखाई कि धान पर कीटों के प्रकोप की संभावना ने किसानों की नींद उड़ा दी है। खरीफकी मुख्य फसल धान में मूल गोभ बेधक (शूट बोरर) पत्ती लपेटक कीट, हरा फुदका जैसे कींटों के लगने की आशंका प्रबल हो गई है। लखनऊ के जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनय सिंह ने किसानों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। उन्होंने बतायसा कि वर्तमान अवस्था में मूल गोभ बेधक (शूट बोरर) पत्ती लपेटक कीट, हरा फुदका आदि कीटोें का प्रकोप बढ़ सकता है। धान में मिथ्या कंडुआ (फाल्स स्मट) नामक रोग लगने की भी संभावना है। ऐसे में इनके नियंत्रण के लिए फसल की सतत निगरानी करते रहें एवं कीट-रोग का प्रकोप होने पर उपाय अपनाकर फसलों को बचा सकते हैं। 

ऐसे बचेगी फसल

  • गाल मिज कीट की रोकथाम के लिए किसान क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी 1.25 लीटर की मात्रा को 500 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करें।
  • पत्ती लपेटक कीट की रोकथाम हेतु एजैडीरैक्टिन 0.03 प्रतिशत की दो लीटर मात्रा को
  • एक हजार लीटर पानी के साथ प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना करें या कारटाप हाइड्रोक्लोराइड चार प्रतिशत जीआर की 18-20 किलोग्राम मात्रा को एक हेक्टेयर में छिड़काव करें।
  • मूल गोभ बेधक (शूट बोरर) या तना छेदक के प्रकोप होने की अवस्था में क्लोरपाइरीफास-20
  • प्रतिशत ईसी की 1.25 ली अथवा क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी की 150 मिली मात्रा को
  • 500 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर में छिड़काव करें। कारटाप हाइड्रोक्लोराइड
  • चार प्रतिशत जीआर की 18-20 किलोग्राम मात्रा का प्रतिहेक्टेयर छिड़काव करें।
  • हरा फुदका कीट की रोकथाम के हक्लोरपाइरीफस 50 प्रतिशत ईसी की 800 मिली मात्रा
  • को 750 ली0 पानी में मिलाकर छिड़काव करने से कीट का नियंत्रण हो जाता है।
  • धान में दीमक का प्रकोप होने की दशा में क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी की 750-800
  • मिली मात्रा को सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • यदि पिछले वर्ष मिथ्या कंडुआ (फाल्स स्मट) का प्रकोप हुआ हो तो फसल की दुग्धावस्था
  • में कापर हाइड्रोक्साइड 77 प्रतिशत की दो किलोग्राम मात्रा 750 लीटर पानी के साथ
  • प्रयोग करना चाहिए।

Edited By: Vikas Mishra