लखीमपुर [हरीश श्रीवास्तव]। भारत नेपाल सीमा के गौरीफंटा बार्डर पर इन दिनों एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है। नेपाल सीमा खुलने के बाद दवाओं की तस्करी बड़ी मात्रा में हो रही है। दवाएं नेपाल के पहाड़ी जिलों में भेजी जा रही हैं। इसके लिए सोची-समझी साजिश के तहत नेपाल के पहाड़ी युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनसे एक विशेष कंपनी की दवाओं की तस्करी कराने का काम लिया जा रहा है। पुलिस व एसएसबी ने इसका संज्ञान लेकर उस पर नजर रखनी शुरू कर दी है।

पिछले एक सप्ताह से नेपाल के पहाड़ी युवाओं को थोड़ी-थोड़ी दवाइयां ले जाते बार्डर पर देखा गया है लेकिन, अब यह मात्रा बढ़ रही है। जिसकी जांच में यह पाया गया है कि जिस कंपनी की दवा की तस्करी की जा रही है उस संबंधित कंपनी का आफिस लखनऊ में है। जहां नेपाली लड़के-लड़कियों को कंपनी का एजेंट बनाकर उनसे उनके देश नेपाल में दवाओं की तस्करी कराई जा रही है। इस तरह का काम इससे पहले भी एक बार शुरू हुआ था लेकिन, तब एसएसबी ने कई बार बड़ी मात्रा में दवाएं पकड़कर कंपनी को तगड़ा झटका दिया था जिससे कंपनी की कमर टूट गई थी। बाद में नेपालियों के भी समझ में आ गया था उन्हें नौकरी देकर एजेंट बनाने की बजाय तस्कर बनाया जा रहा है और उन्होंने काम से मुंह फेर लिया था। अब पुन: उसी तर्ज पर दोबारा दवाओं की तस्करी का काम बड़े पैमाने पर शुरू किया गया है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार: इस संबंध में क्षेत्राधिकारी अभय प्रताप मल्ल ने बताया कि सीमा पर दवाओं की तस्करी का कोई मामला अभी पकड़ में नहीं आया है। छिटपुट तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं और पुलिस व एसएसबी उसपर कार्रवाई करती है। नेपाली युवाओं को नौकरी देकर उनसे तस्करी कराने का मामला काफी गंभीर प्रकृति का है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

Edited By: Rafiya Naz