लखनऊ, जागरण संवाददाता। खेल के दौरान या फिर दुर्घटना में घुटने और हड्डियों में लगी चोट का यदि सही इलाज न मिले तो उम्र बढ़ने पर यह गठिया की बीमारी का रूप ले सकती है। इसलिए घुटने की चोट का सही इलाज बेहद जरूरी है। लखनऊ कैडवरिक वर्कशाप वेलफेयर सोसाइटी की ओर से किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के एनाटामी विभाग में लखनऊ कैडेवरिक नी वर्कशाप और सीएमई (निरंतर चिकित्सा शिक्षा) -2022 का आयोजन किया गया।

इस आयोजन में एम्स नई दिल्ली के अपेक्स ट्रामा सेंटर के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. विवेक त्रिखा ने बताया कि कई नई तकनीक और इलाज की विधियां इजाद हो चुकी हैं जिनसे हड्डियों के साथ लिगामेंट की चोट को भी पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

इस आयोजन में देशभर के विभिन्न राज्यों और नेपाल से भी हड्डी और ज्वाइंट सर्जन्स ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला के निदेशक और रेडियस ज्वाइंट सर्जरी अस्पताल के ज्वाइंट सर्जन डा. संजय श्रीवास्तव ने बताया कि यह देश की पहली ऐसी कार्यशाला है जिसमें जोड़ों और लिगामेंट की सर्जरी के बारे में कैडेवर पर चिकित्सकों को आर्थ्रोस्कापी, लिगामेंट रिपेयर और रिकंस्ट्रक्शन समेत अन्य तकनीक दिखाई जा रही है।

केजीएमयू के स्पोर्ट्स इंजरी विभाग के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार ने बताया कि घुटने या लिगामेंट में लगी चोट आगे चलकर काफी पीड़ादायक होती है। ऐसे में यदि कैडेवर पर चिकित्सक इसके इलाज के विभिन्न विधियां सीखते हैं तो मरीजों पर इलाज करना उनके लिए आसान हो सकता है।

इस कार्यशाला में सूरत के डा. जिग्नेश पंड्या, सर गंगा राम अस्पताल नई दिल्ली से डा. प्रदीप बगेजा, वाराणसी से डा. विनय पांडे, लोहिया संस्थान लखनऊ से डा. सचिन अवस्थी, अपोलोमेडिक्स अस्पताल से डा. संदीप गुप्ता, रेडियस ज्वाइंट सर्जरी अस्पताल से डा. प्रवीण कुमार समेत कुछ अन्य लोग उपस्थित रहे।

Edited By: Vikas Mishra