लखनऊ, जागरण संवाददाता। प्रति वर्ष देश में कैंसर से लाखों लोगों की मौत हो रही है। अक्सर मरीज इलाज को तब पहुंचते हैं जब उनकी समस्या काफी बढ़ चुकी होती है। आखिरी स्टेज में पहुंचने वाले मरीजों में रिकवरी की संभावना भी बहुत कम रह जाती है। गुरुवार को दैनिक जागरण के हेलो डाक्टर में लोगों के सवालों का जवाब देते लोहिया संस्थान में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के विभागाध्यक्ष डा. मधुप रस्तोगी ने कहा कि शरीर में कोई लक्षण या गांठ का आकार असमान्य तरीके से बढ़ रहा है और समस्या लंबे समत तक बनी रह रही है तो इसकी जांच जरूर करवानी चाहिए। जरूरी नहीं कि यह असमान्य लक्षण कैंसर ही हो, मगर यह कोई दूसरी बीमारी है यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। इसलिए लोगों को सजग रहना चाहिए। उन्होंने तमाम अन्य सवालों के जवाब भी दिए। पेश हैं प्रमुख सवाल और उनके जवाब

सवाल: मुझे प्रोस्टेट कैंसर है। 2014 में मुंबई के टाटा अस्पताल में इसे ऑपरेट कराया था। अभी पीएसए 0.08 है। मगर अब हड्डियों में दर्द रह रहा है?-रामनाथ(75 वर्ष), सीतापुर

जवाब: पीएसए एक से नीचे होने का मतलब आपका सबकुछ बहुत नियंत्रित है। आपका इलाज भी अच्छी जगह से हो रहा है। आपको ङ्क्षचता करने की ज्यादा जरूरत नहीं है। हड्डियों में दर्द विटामिन डी की वजह से भी हो सकता है। आपको एक बार बोन स्कैन करा लेना चाहिए।

सवाल: कैंसर के लक्षण कैसे पता चलते हैं?- सत्येंद्र दुबे, गोंडा

जवाब: अगर आपके शरीर में कोई समस्या लगातार व लंबे समय से बनी है या कोई गांठ का आकार लगातार बढ़ रहा है तो उसकी जांच जरूरी है। यह आवश्यक नहीं कि ऐसी समस्या कैंसर ही हो, लेकिन वह कैंसर हो भी सकती है। इसी तरह यदि मुंह का छाला लंबे समय से ठीक नहीं हो रहा। साथ ही छालों में दर्द या खून आ रहा है अथवा छाले का आकार बढ़ रहा है तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। मलद्वार में रक्त आ रहा है और यह बवासीर भी नहीं है तो रैक्टम कैंसर हो सकता है। इस प्रकार कोई भी असाधारण लक्षण जो शरीर में है और ठीक नहीं हो रहा है तो कैंसर के प्रति सतर्क हो जाना चाहिए और जांच करवानी चाहिए।

सवाल: मेरे बड़े भाई के गले में ढाई महीने से दिक्कत है। खाना खाने पर वह सीने के पास अटकता है, सिर्फ लिक्विड ले पाते हैं? अयोध्या में जांच कराने पर कैंसर की आशंका जताई है?- विनय कुमार, नवाबगंज, गोंडा

जवाब: आप मरीज की बायोप्सी करा लें। आहार नली में समस्या हो सकती है। अगर बायोप्सी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है यानि कैंसर की पुष्टि होती है तो इसका इलाज संभव है। डाक्टर कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या सर्जरी के जरिए बीमारी का इलाज करेंगे।

सवाल: मेरी उम्र 68 वर्ष है। 2012 में पैंक्रियाज का ऑपरेशन हुआ था, जिसमें सिस्ट निकला था। अब डाक्टर ने मेटा स्टेटिक न्यूरो ट्यूमर बताया है। मगर क्रिटनिन ज्यादा होने से पीजीआइ में थेरेपी नहीं हो पा रही। क्या करें?- विनय भार्गव, लालबाग लखनऊ

जवाब: आपका इलाज एसजीपीजीआइ जैसे संस्थान से चल रहा है। जो कि काफी उत्कृष्ट है। क्रिटनिन के लिए एक बार नेफ्रो के डाक्टर से मिल लें। यह समस्या ठीक होने पर आप एलयू थेरेपी करा सकते हैं या फिर आप एम्स भी ट्राई कर सकते हैं।

सवाल: मेरे बाबा के गले में कैंसर है। केजीएमयू में दो बार कीमो व एक बार सेंकाई हो चुकी है। आराम कब होगा?- सुभाष कुमार, जवाहरपुर, सीतापुर

जवाब: अभी तो सिर्फ एक दो सेंकाई हुई है। जब 30-35 सेंकाई हो जाए तो पता चलेगा कि कैंसर कितना ठीक हुआ। प्रभावित भाग पर पानी न पडऩे दें, उसे रगड़ से बचाएं। हर हफ्ते खून की जांच कराते रहें। साथ ही डाक्टरों की सलाह पर थेरेपी कराते रहें।

सवाल: मेरे भाई को एक साल पहले पैर में गांठ थी। कैंसर निकला तो बनारस के टाटा अस्पताल में ऑपरेशन करा दिया। अब पता चल रहा कि फेफड़े में पहुंच गया है व उसमें पानी भर रहा है?- अनीता वर्मा, मुंशीपुलिया, लखनऊ

जवाब: आपका इलाज जहां चल रहा है, वहीं कराते रहें। इधर-उधर भटकें नहीं। इसमें कीमो देते हैं। फेफड़े के पानी को बार-बार सुई डालकर निकाल नहीं सकते। इसीलिए उसमें ट््यूब लगा दी जाती है, जिससे पानी थोड़ा-थोड़ा करके निकलता रहता है। कमजोरी व अन्य समस्याएं बीमारी की वजह से हैं। इलाज नियमित कराते रहें, घबराएं नहीं।

सवाल: मेरे मलद्वार के रास्ते में बवासीर थी। अब उसमें नीचे मांस बढ़ गया है, क्या यह कैंसर हो सकता है?- पंकज मिश्रा, रायबरेली

जवाब: आप किसी गैस्ट्रोसर्जन को दिखा लें। कई बार बवासीर लंबे समय तक रहने व खून निकलते रहने पर गांठ बन जाती है। परीक्षण से ही पता लग सकेगा कि इसमें रेक्टम कैंसर तो नहीं बन रहा।

सवाल: मेरे पिता को ब्लड कैंसर है। पीजीआइ से इलाज चल रहा है। मगर बार-बार उनकी पता नहीं क्यों प्लेटलेट्स कम हो जा रही है और खांसी भी आती है?- पूजा मेहरोत्रा, निरालानगर लखनऊ

जवाब: आपका इलाज अच्छी जगह से चल रहा है। अपने डाक्टर को एक बार दिखा लें। खांसी के लिए आप किसी चेस्ट फिजीशियन को भी दिखा सकती हैं। कैंसर होने पर इस तरह की समस्याएं व शरीर में कमजोरी महसूस होती है। इसके लिए खान-पान को पौष्टिक रखें। सकारात्मक रहें।

सवाल: गाल ब्लैडर का कैंसर क्या ठीक हो सकता है?- राहुल रायबरेली

जवाब: कैंसर कोई भी हो, मरीज को अर्ली स्टेज में जांच कराना है। यदि उसका इलाज सही समय पर शुरू हो जाए तो उसे दवा, थेरेपी या सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। यदि कैंसर गाल ब्लैडर से निकलकर फेफड़े तक फैल गया व बीमारी तीसरे चौथे स्टेज में पहुंच गई तो दिक्कत हो सकती है।

सवाल: मेरे सास के मुंह में ब्लड आता है। पहले मसाला खाती थी। सिर्फ लिक्विड ही ले पाती हैं?- नरेंद्र मानस नगर, लखनऊ

जवाब: अगर उनका मुंह पूरा नहीं खुल पा रहा। अंदर सिर्फ दो ही उंगली जा पा रही है और घाव व छाले भी हैं तो यह कैंसर हो सकता है। किसी डाक्टर से मिलकर इसकी बायोप्सी करा लें। फिर आगे का इलाज शुरू होगा।

सवाल: मैं फौजी हूं। जबड़े में बाईं तरफ कैंसर की शिकायत है। डाक्टर ने सर्जरी बताई है। मैं कराना नहीं चाहता। अभी होम्योपैथी इलाज ले रहा हूं?- रामायण शर्मा, राजीवनगर घुसियाना, लखनऊ

जवाब: अगर जांच में कैंसर कन्फर्म हो चुका है तो इसकी सर्जरी ही होगी। आप होम्योपैथी या किसी दूसरी पैथी के चक्कर में नहीं पड़ें। अपने डाक्टर से मिलकर इसे जल्दी से जल्दी ऑपरेट करा दें।

सवाल: आसपास कैंसर के काफी मरीज हैं, उन्हें सरकारी मदद कैसे मिल सकती है?

प्रदीप कुमार, काकोरी, लखनऊ

जवाब: शरीर में किसी भी आसमान्य लक्षण को नजरंदाज नहीं करना चाहिए, मगर ऐसा नहीं हो रहा। इसीलिए दिनोंदिन कैंसर के मरीज बढ़ भी रहे हैं। सरकारी मदद आयुष्मान कार्ड से पांच लाख तक का इलाज, 35 हजार से कम वार्षिक आय पर नि:शुल्क इलाज मुहैया कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के राहतकोष से भी पैसा आता है।

Edited By: Vikas Mishra