अयोध्‍या, जागरण संवाददाता। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश पूजा सिंह ने नवविवाहिता साधना व उसकी मासूम बेटी गरिमा की हत्या के मामले में पति विश्वनाथ, देवर रघुनाथ व सास मालती को तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तीनों पर कुल एक लाख 92 हजार का जुर्माना किया गया है। जुर्माना की आधी रकम मृत साधना के पुत्र को दी जाएगी।

इस हत्या में एक तांत्रिक रामदीन ओझा की भूमिका भी पाई गई है। उसका मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय से स्थगित है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रमेश कुमार तिवारी व रोहित पांडेय के मुताबिक सभी अभियुक्त बीकापुर कोतवाली क्षेत्र के नौरावां गांव के निवासी हैं। पिता रामकरन की तहरीर के अनुसार ससुराल वालों ने तांत्रिक के बहकावे में आकर साधना व गरिमा को चार जुलाई 2019 की रात केरोसिन से जला कर मार डाला था।

मृतका का मायका बीकापुर कोतवाली क्षेत्र के माेतीगंज बाजार में है। साधना का विवाह घटना के करीब पांच साल पूर्व विश्वनाथ के साथ हुआ था। शादी के कुछ माह बाद ही साधना पर दहेज में मोटर साइकिल व नगद रुपये मायके से लाने का दबाव पड़ने लगा। इस बीच साधना को एक बेटा व बेटी पैदा हुई, लेकिन ससुरालवालों की प्रताड़ना पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

साधना की बेरहमी से पिटाई कर घर से निकाल दिया गया। मायके वालों ने कर्ज लेकर 10 हजार रुपये के साथ साधना को ससुराल भेज दिया। इस बीच तांत्रिक रामदीन ओझा ने ससुरालवालों को भड़काया कि साधना अपने साथ प्रेतात्मा का साया लेकर आई है, जिसके निदान के लिए अनुष्ठान करना पड़ेगा। इसके लिए 50 हजार रुपये का खर्च बताया गया। यह रकम मायके से मंगाने का दबाव साधना पर बनाया गया।

ससुरालवालों से साधना से बोलना तक बंद कर दिया। वारदात की आशंका पर साधना ने फोन पर पिता को बताया कि उसकी हत्या की तैयारी की जा रही है। अगले दिन साधना की मौत की खबर मिली। पति की जमानत अर्जी उच्च न्यायालय ने खारिज कर मुकदमें के त्वरित निस्तारण का आदेश अधीनस्थ न्यायालय को दिया था।

Edited By: Anurag Gupta