लखनऊ, जेएनएन। उच्‍च न्यायालय में मुकदमा लडऩे वाले वादकारी अब यह समझ सकेंगे कि न्यायमूर्तियों ने उनके मामले में क्या और किस आधार पर फैसला दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट जनवरी से उन्हें फैसलों की अनूदित और अधिकृत प्रति उपलब्ध कराएगा। हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति की बैठक में इस निर्णय को मंजूरी मिल चुकी है।

यहां अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह विडंबना ही है कि लोग अपने मुकदमों के निर्णय को समझ नहीं पाते। अनुच्‍छेद 348 में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की भाषा अंग्रेजी है। हिंदी व अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को वह स्थान नहीं मिल सका, जो मिलना चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि इस बात की भी कोशिश की जा रही है कि ऐसे लोगों का न्यायपालिका में उचित प्रतिनिधित्व हो। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी उनके इस निर्णय की सराहना की। साथ ही कहा कि अनुवाद में कोशिश की जाए कि भाषा सरल हो। कानून मंत्री ने अन्य प्रांतों में भी वहां की भाषा के अनुसार फैसलों की प्रति उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।

Posted By: Anurag Gupta