लखनऊ, जेएनएन। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने विवेक तिवारी हत्याकांड मामले में अभियुक्त संदीप कुमार को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश जस्टिस दिनेश कुमार सिंह ने संदीप कुमार की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए पारित किया। संदीप की ओर से तर्क दिया गया कि वह निर्दोष है तथा उसे गलत फंसाया जा रहा है। राज्य सरकार व मृतक की पत्नी कल्पना तिवारी की ओर से जमानत का विरोध कर कहा गया कि अभियुक्त पुलिसकर्मी है उसके खिलाफ मृतक की हत्या करने के पूरे सबूत मौजूद हैं। यह भी कहा गया कि यदि संदीप को जमानत पर रिहा किया गया तो वह जांच को प्रभावित करेगा। 

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मेरिट पर बिना कोई टिप्पणी किये संदीप को जमानत देने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने संदीप को जमानत देते हुए उन पर कई बंदिशें लगायी हैं। कोर्ट ने कहा कि संदीप रिहा होने के बाद जमानत का दुरुपयोग नहीं करेगा।  

बता दें, मामले में संदीप कुमार के विरुद्ध मात्र मारपीट की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसमें उसे जमानत भी मिल गई थी, लेकिन सत्र अदालत ने उसके खिलाफ हत्या के दुष्प्रेरण का आरोप तय करने का प्रर्याप्त आधार पाते हुए, उसे आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। एक अप्रैल को सत्र अदालत ने उसकी जमानत अर्जी नामंजूर कर दी थी, जिसके बाद संदीप ने हाईकोर्ट से जमानत मांगी थी। 

 

ये था पूरा मामला 
बता दें, मूल रूप से सुल्तानपुर के शंकरपुरम करौंदिया निवासी विवेक तिवारी लखनऊ के न्यू हैदराबाद कॉलोनी के आकाश गंगा अपार्टमेंट में रहते थे। 28 सितंबर 2018 को उनके ऑफिस में एप्पल फोन के नये ब्रांड की लॉन्चिंग थी। विवेक रात बारह बजे तक वहां थे। इसके बाद वह पूर्व महिला सहकर्मी सना खान को कार से छोड़ने गोमतीनगर के विनय खंड निकले। सना खान के अनुसार, गाड़ी गोमतीनगर विस्तार में सरयू अपार्टमेंट के पीछे पहुंची थी कि बाइक सवार दो सिपाही प्रशांत और संदीप कुमार अचानक ओवरटेक कर आगे आ आए और गाड़ी रोकने का इशारा किया।

 

सना के मुताबिक, कार में महिला बैठी होने के नाते विवेक ने गाड़ी नहीं रोकी तो सिपाहियों ने कार के आगे बाइक लगा दी, जिस पर विवेक ने थोड़ा गाड़ी आगे ली तो सिपाही की बाइक गिर गई। इस पर विवेक तिवारी ने पीछे की ओर गाड़ी करके साइड से निकलने का प्रयास किया, तभी उनमें से एक सिपाही प्रशांत ने सामने खड़े होकर आगे शीशे पर पिस्टल से गोली मार दी, जो विवेक जा लगी। विवेक जख्मी हालत में गाड़ी चलाते रहे। कुछ दूर जाकर गाड़ी सड़क के किनारे खंभे से टकराकर रुक गई। लगभग दस मिनट बाद वहां पुलिस पहुंची और घायल विवेक को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में आरोपित दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर बर्खास्त कर दिया गया था। घटना की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआइटी) गठित की गई। प्रथमदृष्टया जो लोग दोषी पाए गए हैं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

 

इन बिंदुओं की एसआईटी ने की थी जांच 

  • विवेक की गाड़ी पहले से रुकी थी या सिपाहियों ने रुकवाई?
  • विवेक और आरोपियों के बीच क्या बातचीत हुई थी?
  • विवेक और सिपाहियों की गाड़ी में टक्कर हुई थी। हुई तो कैसे?
  • पुलिसकर्मी ने गोली क्यों चला दी?
  • विवेक को गोली कितनी दूर से मारी गई?
  • गोली किस दिशा से चली?
  • दोनों एयर बैग पर खून कैसे आया?
  • गियर पर काफी खून था। यह खून कैसे आया?
  • विवेक को अस्पताल ले जाने में क्या पुलिसकर्मियों ने देर की?
  • सना की सूचना पर पहले कौन पुलिसवाला पहुंचा था?
  • परिवारीजनों को समय पर सही सूचना क्यों नहीं दी गई?
  • आनन-फानन में सना की तहरीर पर एफआईआर क्यों दर्ज कर ली?
  • आरोपी प्रशांत चौधरी हिरासत में होने के बावजूद थाने पर हंगामा कैसे करता रहा?
  • घटनाक्रम में किसी और पुलिसवाले की कोई भूमिका तो नहीं है?

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