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'स्कूलों के आसपास ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के बताए उपाय'; इलाहाबाद HC की लखनऊ खंडपीठ ने CBSE को दिए निर्देश

Published: Wed, 28 Oct 2026 09:04 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीबीएसई को स्कूलों के आसपास यातायात व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपाय बताने का निर्देश दिया है।

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HighLights

  1. सीबीएसई को स्कूलों में यातायात व्यवस्था सुधारने के निर्देश।

  2. बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपाय बताएं।

  3. आदेश न मानने वाले स्कूलों पर होगी सख्त कार्रवाई।

विधि संवाददाता, लखनऊ। स्कूलों के आसपास यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को प्रभावी उपाय बताने होंगे। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारी को अगली सुनवाई पर उपस्थित होने का निर्देश देते हुए पूछा है कि संबद्ध स्कूलों में न्यायालय के आदेशों का पालन कैसे सुनिश्चित कराया जाएगा।

कोर्ट ने आदेशों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की पीठ ने राजधानी के गोमती नदी तटवर्ती क्षेत्र के निवासियों की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया।

कोर्ट ने कहा कि सीबीएसई को पक्षकार बनाने का उद्देश्य संबद्ध स्कूलों में यातायात प्रबंधन संबंधी पूर्व आदेशों का पालन सुनिश्चित कराना है। सुनवाई में उप परिवहन आयुक्त ने बताया कि स्कूली वाहनों की जांच जारी रहेगी और मोटर वाहन अधिनियम तथा उसके तहत बने नियमों का पालन कराया जाएगा।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए यह अभियान नियमित रूप से चलाया जाए, न कि एक बार की कार्रवाई तक सीमित रखा जाए। यातायात समस्याओं के समाधान के लिए गठित समिति के अध्यक्ष रहे लखनऊ के पुलिस उपायुक्त (यातायात) का तबादला होने पर कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को अपर महाधिवक्ता से परामर्श कर नया अध्यक्ष नामित करने का निर्देश दिया।

अधिकारी का पद पुलिस उपायुक्त से नीचे का नहीं होना चाहिए। यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 10 दिन के भीतर पूरी करनी होगी। स्कूलों के भवन निर्माण के नक्शों की जानकारी पड़ोसी जिलों से नहीं मिलने पर राज्य सरकार को 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। नक्शे मिलने के बाद अगली सुनवाई पर उनकी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

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