बीडीएस की पढ़ाई कर रहे हारिश ने कई शहरों में फैलाया था ISIS की आतंकी गतिविधियों का जाल
White Collar Terror Module: एटीएस यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर हारिश आईएसआईएस के जाल में कैसे फंसा।

सहारनपुर में हारिश का मकान.
HighLights
रिमांड पर लेने के लिए एटीएस आज अदालत में देगा अर्जी
हारिश ने इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म से जोड़े थे कई चेहरे
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की सूची में मुरादाबाद से बीडीएस की पढ़ाई कर रहे सहारनपुर निवासी 19 वर्षीय हारिश का नाम भी जुड़ गया है। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस)ने सोमवार को हारिश को मुरादाबाद से गिरफ्तार किया था।
हारिश अली की एटीएस से पूछताछ में पता चला है कि उसने आतंकी गतिविधियों का जाल कई शहरों में फैला रखा था। मुरादाबाद से बीडीएस की पढ़ाई कर रहे सहारनपुर निवासी 19 वर्षीय हारिश ने इंस्टाग्राम सहित सेशन और डिस्कार्ड जैसे एन्क्रिप्टेड इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म पर फर्जी नामों और वीपीएन का उपयोग कर आइसिस समर्थित ग्रुप बनाकर उससे विभिन्न शहरों के 50 से ज्यादा युवाओं को जोड़ा था। एटीएस इस मामले में गुरुवार को अदालत में आरोपित को रिमांड पर देने के संबंध में अर्जी दाखिल करेगा।
एटीएस की अभी तक की जांच में यह सामने आया है कि आरोपित ने मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, सहारनपुर, वाराणसी, लखनऊ व प्रयागराज सहित अन्य जिलों के दर्जनों युवाओं को आईएसआईएस के साथ जोड़ा था। यह युवा आईएसआईएस के हैंडलरों के साथ संपर्क में थे। इनके जरिए आइसिस की विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। इसके साथ ही देश विरोधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही थी।
एटीएस यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर हारिश आईएसआईएस के जाल में कैसे फंसा। एटीएस इसकी भी जांच कर रहा है कि हारिश कहीं डा. अदिल के साथ संपर्क में तो नहीं था। सहारनपुर में दोनों के घर पास ही हैं और डा. अदिल जम्मू-कश्मीर में जैश ए मोहम्मद के लिए काम कर चुका था।
आशंका जताई जा रही है हारिश डा. आदिल के जरिए ही जम्मू-कश्मीर तक जैश ए मोहम्मद के आतंकियों के सपंर्क में आया था। चूंकि वह अधिकतर समय लैपटाप पर ही सक्रिय रहता था इसलिए उसके बारे में उसके साथ पढ़ने वाले अन्य छात्रों को भी कोई खास जानकारी नहीं है। हारिश दादा-परदादा बड़े जमींदारों में थे। उसके पिता एक निजी कंपनी में नौकरी कर रहे हैं। हारिश का बड़ा भाई MBBS, MD है। उसकी बहन भी MBBS कर रही है। हारिश के परिवार का किसी से कभी कोई विवाद नहीं हुआ।
सहारनपुर से पकड़े गए हैं कई संदिग्ध
इससे पहले भी कई संदिध सहारनपुर से पकड़े जा चुके हैं। आतंकी संगठनों ने शिक्षित लोगों को संगठन से जोड़ना शुरू कर दिया है। मेडिकल पेशे से जुड़े लोगों को सॉफ्ट टारगेट माना जा रहा है। पिछले दिनों सहारनपुर के अस्पताल में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर आकिल की गिरफ्तारी के बाद यूपी समेत कई जगहों से बड़ी संख्या में डॉक्टर गिरफ्तार किए गए थे। डॉक्टर आकिल अहमद भी सहारनपुर के उसी इलाके में किराए पर रहता था, जहां मुरादाबाद में पकड़े गए बीडीएस के छात्र हारिश अली का मकान है।
बनाए थे कई ग्रुप्स
हारिश देश में आईएसआईएस मॉड्यूल के हैंडलरों व अन्य मुजाहिद साथियों के साथ जुड़कर चुनी गई लोकतांत्रिक सरकार गिराकर खिलाफत व्यवस्था के अंतर्गत शरिया कानून लाना चाहता था। हारिश ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम व इनक्रिप्टेड एप्स यथा सेशन व डिसकॉर्ड आदि पर छद्म नामों से वीपीएन आदि प्रयोग करते हुए आईएसआईएस समर्थित ग्रुप्स बनाए थे। उसमें ज्यादा से ज्यादा जेहादी ख्याल रखने वाले लोगों को रिक्रूट कर रहा था। इन ग्रुपों में आईएसआईएस के मीडिया चैनलों, पत्रिकाओं, प्रचार-प्रसार की सामग्रियों, आतंकी विचारधाराओं व मारे गए आतंकियों के चित्र, वीडियो व ऑडियो साझा करता था।
