लखनऊ, जेएनएन। सपा-बसपा गठबंधन का औपचारिक एलान शनिवार को होगा लेकिन, भाजपा ने शुक्रवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में उत्तर प्रदेश जीतने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को जोश से लबरेज कर दिया। गोरखपुर और फूलपुर उप चुनाव हारने के बाद से ही भाजपा ने बूथों तक अपनी जमीनी तैयारी की है और सपा-बसपा जिस जातीय गोलबंदी से चुनाव जीतने का ताना-बाना बुन रही है, भाजपा उसी हथियार से निशाना साधेगी। 

जमीनी स्तर पर भाजपा की अपनी तैयारी 

भाजपा को गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर चुनाव हारने की कसक है। इसीलिए पिछले एक वर्ष में जमीनी स्तर पर भाजपा ने अपनी तैयारी की है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले ही बूथ जीतो का फार्मूला दिया और सफलता मिली। इस बार प्रदेश के 1.67 लाख बूथों पर 21 सदस्यों तक की समितियां बनाई गई। पार्टी ने अपने इन कार्यकर्ताओं को परखा। बाइक रैली से लेकर सम्मान समारोह तक इनका चेहरा उभारा और थाना, ब्लाक, तहसील से लेकर जिले तक पहचान बनाई। रात्रि चौपालों में इन कार्यकर्ताओं को खूब तरजीह मिली। 

सबने की सबको साधने की कोशिश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व और धर्म स्थलों के विकास के पर्याय बने तो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पिछड़ों के बीच सर्वमान्य चेहरा बनकर उभरे हैं। उधर, दलित नेताओं की भी प्रदेश में एक बड़ी कतार बनी है। केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज से लेकर अनुसूचित मोर्चा अध्यक्ष व सांसद कौशल किशोर, पूर्व सांसद जुगुल किशोर समेत कई नेता आगे किये गये हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और सुनील बंसल ने संगठन के जरिये अपनी तैयारी पुख्ता की है। 

पिछड़ों-दलितों के सम्मेलन से बनाये समीकरण 

भाजपा ने पिछड़ों और दलितों के जातिवार सम्मेलन आयोजित किये। गैर जाटव दलितों में पासी, कोरी, धोबी, सोनकर-खटिक, वाल्मीकि, धाुनक, दुसाध आदि जातियों को सहेजा गया। इनके ख्वाबों को ऊंचाई दी और दूसरी तरफ सभी पिछड़ी जातियों के साथ यादवों पर भी भाजपा ने दांव लगाया। कुर्मी, राजभर, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, जाट, गुर्जर, समेत सभी पिछड़ी जातियों में भाजपा की पैठ बनी है। भाजपा ने अब तक जो बुनियादी ढांचा मजबूत किया, उसे दिल्ली के राष्ट्रीय अधिवेशन में दिशा दी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए अब 75 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर दिया है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देंगे। 

सवर्ण कार्ड का भी होगा असर 

मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आधार पर दस फीसद आरक्षण की व्यवस्था करके एक बड़ी लकीर खींची है। इससे न केवल एससी-एसटी एक्ट के संशोधन से उपजी नाराजगी दूर हुई है बल्कि प्रदेश की 40 से अधिक सीटों पर नया माहौल बना है। 

Posted By: Nawal Mishra