विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गोरखपुर के फर्जी कॉल सेंटर से ब्रिटिश नागरिकों से साइबर ठगी, ED ने की 3.72 करोड़ की संपत्ति कुर्क

Published: Sat, 24 Oct 2026 10:46 PM (IST)

प्रवर्तन निदेशालय ने गोरखपुर के फर्जी कॉल सेंटर से ब्रिटेन के बुजुर्गों को ठगने वाले गिरोह पर शिकंजा कसा है। ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. ईडी ने गोरखपुर साइबर ठगी मामले में कार्रवाई की।

  2. ब्रिटेन के बुजुर्गों को निशाना बनाकर ठगी की जाती थी।

  3. 3.72 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। गोरखपुर में दर्ज साइबर ठगी के मामले में ब्रिटेन के नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले गिरोह पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकंजा कसा है। ईडी की प्रयागराज उप क्षेत्रीय इकाई ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत करीब 3.72 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की हैं।

जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और झारखंड के रांची में दो कंपनियों के माध्यम से फर्जी काल सेंटर संचालित किए थे। यहां से ब्रिटेन के नागरिकों को दूरसंचार सेवा प्रदाता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का प्रतिनिधि बनकर फोन किया जाता था।

कुर्क संपत्तियों में कोलकाता स्थित एक भूखंड और फ्लैट, बैंक खातों में जमा धनराशि तथा बीमा पालिसियां शामिल हैं। ईडी के अनुसार, मामले के प्रमुख आरोपित अनिक दत्ता ने एक अन्य आरोपित के साथ मिलकर कथित ठगी से लगभग सात करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय जुटाई थी।

दी गई थी बुजुर्गों को ठगने की ट्रेनिंग

ईडी ने गोरखपुर साइबर क्राइम थाने में दर्ज प्राथमिकी और दाखिल आरोपपत्र के आधार पर धन शोधन की जांच शुरू की थी। मामले में अनिक दत्ता, आकाश गुप्ता, आदित्य मिश्रा और अन्य आरोपित हैं। गोरखपुर में संचालित फर्जी काल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों को ब्रिटेन के नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों को ठगने का प्रशिक्षण दिया गया था।

वे ब्रिटेन की दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी के प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करते और इंटरनेट की गति बढ़ाने के नाम पर उनके कंप्यूटर में रिमोट एक्सेस साफ्टवेयर डाउनलोड कराते थे। इससे आरोपितों को पीड़ितों के कंप्यूटर तक पहुंच मिल जाती थी और वे बैंकिंग विवरण समेत संवेदनशील जानकारियां हासिल कर लेते थे।

इसके बाद पीड़ितों को बताया जाता था कि उनके इंटरनेट कनेक्शन पर साइबर हमला हुआ है और ब्रिटेन की एजेंसी एक्शन फ्राड में शिकायत दर्ज की गई है। आरोप है कि काल सेंटर के कर्मचारी बाद में खुद को इसी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ितों को दिए गए बैंक खातों में रकम स्थानांतरित करने के लिए राजी करते थे। इस तरीके से कथित ठगी की रकम जुटाई जाती थी।

यह भी पढ़ें- यूपी विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने सपा को सौंपी 200 सीटों की लिस्ट, 50-55 से ज्यादा सीट देने के मूड में नहीं अखिलेश

ईडी ने अस्थायी कुर्की आदेश के माध्यम से संपत्तियों को कुर्क किया है। जांच एजेंसी अब ठगी से अर्जित धन के प्रवाह, उसके विभिन्न खातों और निवेशों के जरिये इस्तेमाल तथा उससे बनाई गई संपत्तियों के संबंधों की पड़ताल कर रही है।