नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। सुनील राठी ने आखिर उत्‍तर प्रदेश के माफिया डॉन मुन्‍ना बजरंगी की हत्‍या क्‍यों की? इस सवाल का कोई संतोषजनक जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है। पुलिस का कहना है कि बजरंगी ने धनंजय को गाली दी तो राठी ने उसे गोली मार दी। अब ये बात भी सामने आ रही है कि पिस्‍टल बजरंगी की नहीं, बल्कि सुनील की ही थी। लेकिन जागरण संवाददाता की पड़ताल के मुताबिक, इस हत्‍याकांड को एक फोन कॉल आने के बाद अंजाम दिया गया। ये फोन सुनील राठी को आया, जिसके बाद उन्‍होंने बजरंगी को मौत के घाट उतार दिया। अब ये सवाल उठता है कि आखिर सुनील राठी ने किसका फोन आने के बाद बजरंगी पर गोली चलाई? क्‍या बाहर बैठे किसी शख्‍स ने जेल में बंद बजरंगी की मौत की साजिश रची थी?

माफिया डान मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में कई तरह की थ्योरी सामने आ रही है। जागरण की पड़ताल में सुनील राठी ने मेल-मिलाप के दौरान हुए विवाद के बीच एक फोन आने के बाद बजरंगी पर ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी। जबकि, पुलिस फाइल के मुताबिक पूर्व सांसद धनंजय सिंह को बजरंगी ने गाली दी तो राठी अचानक उग्र हो गया और बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी।

जागरण संवाददाता ने जेल में बंद एक कैदी से मुलाकात कर इस हत्याकांड की पड़ताल की। जिसमें पुलिस से इतर नई थ्योरी सामने आई। बंदी के अनुसार, जेल में मुन्ना बजरंगी के प्रवेश के बाद विक्की सुन्हैड़ा ने उसके स्वागत में पलक-पावड़े बिछा दिए। फिर आधी रात के बाद जेल में जश्न मनाया गया। सुबह सुनील राठी और बजरंगी के बीच कहासुनी हो गई। तभी सुनील के पास एक कॉल आई और चंद लम्हों बाद ही सुनील ने मुन्ना बजरंगी की हत्या कर डाली। यह राजफाश जेल में बंद एक बंदी ने किया है।

बागपत के अब्दुलपुर स्थित जिला कारागार में बंद एक प्रत्यक्षदर्शी बंदी के मुताबिक, रविवार रात वह खाना खाकर जेल परिसर में टहल रहा था। करीब सवा नौ बजे जेल का मुख्य द्वार खुला और बाहर खड़ी एक एंबुलेंस को देखकर ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों में हड़बड़ी मच गई। एंबुलेंस में से डरा-सहमा हुआ मुन्ना बजरंगी नीचे उतरा। कई सुरक्षाकर्मी बजरंगी को तन्हाई बैरक की ओर ले गए। इसी बीच विक्की सुन्हैड़ा आया और बजरंगी के गले मिलकर स्वागत किया।

बजरंगी को अलग बैरक में ले जाया जाने लगा तो बजरंगी की मांग पर विक्की और बजरंगी को एक बैरक में रखा गया। थोड़ी देर बाद बराबर वाली बैरक में बंद सुनील राठी उनकी बैरक में आया और हंसीठिठोली होने लगी। रात करीब एक बजे तीनों बैरक के बाहर मैदान में आ गए, जहां उन्होंने शराब पी। करीब ढाई बजे विक्की और बजरंगी एक बैरक में सो गए और सुनील अपनी बैरक में चला गया।

तड़के पांच बजे बैरक खुली तो तीनों बाहर आ गए और चाय का इंतजार कर रहे थे। चाय नहीं आई तो बजरंगी नहाने के लिए चल दिया। इसी बीच सुनील की बजरंगी से किसी टेंडर की बात को लेकर कहासुनी हुई। उस समय विक्की ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। इसी बीच सुनील के पास एक कॉल आई और थोड़ी देर बाद सुनील ने पिस्टल से बजरंगी पर हमला बोल दिया। बजरंगी भागा भी, लेकिन गोली लगने से वह गिर गया। सुनील ने एक मैगजीन खाली कर दूसरी मैगजीन डाली और फिर एक के एक बाद एक सभी गोलियां बजरंगी के शरीर में उतार दीं। यह देखकर वहां तैनात एक पुलिसकर्मी भी भाग निकला। अन्य बैरकों से बाहर घूम रहे बंदी व सजायाफ्ता में भी भगदड़ मच गई। वह जहां के तहां छिप गए। इसके बाद सुनील अपनी बैरक में चला गया। करीब पांच मिनट बाद पुलिसकर्मी, बंदी और सजायाफ्ता मौका-ए-वारदात पर पहुंचे तो बजरंगी का शव लहूलुहान पड़ा था।

सुनील को पुलिसकर्मियों ने घेर लिया और बैरक की तलाशी ली, लेकिन उस समय कुछ नहीं मिला। सुनील ने जरूर कहा कि वह मुझे मारने आया था, मैंने उसे मार दिया। प्रत्यक्षदर्शी का दावा है कि सुनील पर पहले से पिस्टल थी। सवाल उठता है कि सुनील के पास किसकी कॉल आई, जो वह बजरंगी से क्षुब्ध हो गया। पुलिस की कहानी -‘बजरंगी ने धनंजय को दी गाली तो राठी ने मारी गोली’ तारीख आठ जुलाई। समय रात नौ बजे। सुनसान जंगल और बागपत जेल। तभी घुप अंधेरे को चीरती हुई एंबुलेंस समेत कई गाड़ियों का काफिला जेल के मेन गेट पर झटके से रुकता है। एंबुलेंस से मुन्ना बजरंगी उतरता है। जेल के अंदर तन्हाई बैरक में उसे कुख्यात विक्की सुन्हैड़ा मिला। मुन्ना बजरंगी ने सवाल दागा कि सुनील भाई कहां है? विक्की बजरंगी को दूसरी तन्हाई बैरक में ले गया। बजरंगी ने सुनील को देखा और मुस्कुराया। दोनों ने एक दूजे का हाल-चाल पूछा और काफी देर बातें हुई। फिर सुनील राठी बोला कि सफर करके आए हो, थक गए होगे अब आराम करो।

मुन्ना बजरंगी अपनी बैरक में लौटने के बाद काफी देर बेचैनी में चहलकदमी करता रहा। सुबह पांच बजे मुन्ना बजरंगी टॉयलेट जाता है, लेकिन वहां पहले से विक्की है। आवाज सुनकर विक्की टायलेट से बाहर आया और बजरंगी से कहा कि पहले आप टायलेट जाओ। हम तो बाद में चले जाएंगे। फ्रेश होने के बाद जैसे ही बजरंगी बाहर आता है, वैसे ही सुनील राठी से सामना होता है। दोनों बैठ जाते हैं। बजरंगी बोलता है- राठी!...तुम्हारा वजन बढ़ गया है। पेट बाहर निकला है। कुछ करते क्यों नहीं। फिर राठी और बजरंगी उठते हैं। बजरंगी जमीन पर बैठकर राठी को पद्मासन सिखाता है। वापस चाय की चुस्कियों के बीच हंसी- मजाक होने लगा। बताते हैं कि दोनों में विवाद हुआ। दोनों एक-दूसरे पर अपनी हत्या की सुपारी लेने का आरोप लगाने लगे। बहस बढ़ी तो बजरंगी धनंजय सिंह को गाली देते हुए कुछ कहने लगा, तो राठी बोला कि तुमनेउन्हें गाली क्यों दी? ये लो गाली का बदला और ठांय-ठांय।

टिफिन में रखकर जेल में भेजी गई थी पिस्टल
मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद सुबूत मिटाने के लिए सुनील राठी नहाया था ताकि उसके हाथ से गन पाउडर के फोरेंसिक साक्ष्य न जुटाये जा सकें। राठी ने पूरी वारदात को कदम-दर-कदम प्लान किया था। बागपत जेल में कुख्यात राठी का सिक्का चलता था और इसीलिए वह अपनी प्लानिंग में सफल रहा। राठी ने वारदात के बाद कपड़े भी धुलवा दिए थे। घटना के दौरान राठी के साथ उसके तीन और साथी मौजूद थे। जेल में पिस्टल उसे टिफिन के जरिये पहुंचाई गई थी। बागपत जेल में राठी ने सीसीटीवी कैमरे न होने का फायदा उठाया। राठी के लिए बाहर से टिफिन व अक्सर ही स्पेशल खाना आता था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आने पर माना जा रहा है कि टिफिन के जरिये पिस्टल जेल के भीतर पहुंचाई गई।

सूत्रों के अनुसार मुन्ना बजरंगी की हत्या से दो-तीन दिन पहले ही पिस्टल व कारतूस उस तक पहुंचाई गई थीं। जेल में राठी से मिलने आने वाले उसके खास लोगों की जेल रजिस्टर में एंट्री तक नहीं होती थी। कहने को भले ही आजीवन कारावास की सजा काट रहा सुनील राठी तन्हाई बैरक में बंद है, पर उसका कंट्रोल जेल के हर हिस्से में उतना ही था, जितना अपनी बैरक में था। चर्चा तो यह भी है कि बीते एक माह के भीतर पूर्वांचल के एक बाहुबली और पूर्व सांसद भी बागपत जेल में राठी से मिलने पहुंचे थे।

जेल व पुलिस अधिकारियों की छानबीन में ऐसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कुछ खास बिंदुओं पर जांच तेज कर दी गई है। बागपत के निलंबित जेलर उदय प्रताप सिंह किसलिए चुप थे, यह बड़ा सवाल है। अफसरों के सामने पूछताछ में राठी ने हत्या के बाद न सिर्फ नहाने की बात कुबूली, बल्कि यह भी कह दिया कि पिस्टल नाली में इसीलिए फेंकी थी, ताकि उस पर अंगुलियों के निशान न मिलें। राठी व उसके साथियों ने मुन्ना के शव की तस्वीरें भी खींची थीं।

‘पिस्टल बजरंगी की नहीं, सुनील की थी’
मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की जांच कर रही एसटीएफ का दावा है कि सुनील राठी 24 घंटे असलहे से लैस रहता था। पिस्टल बजरंगी की नहीं, बल्कि सुनील की थी। एसटीएफ एसपी आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि बजरंगी की हत्या एक ही पिस्टल से हुई है। सुनील अपनी जान बचाने के लिए पिस्टल बजरंगी की बता रहा है, जबकि जेल के अंदर जाने से पहले बजरंगी की तीन चरणों में र्चेंकग की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, हत्या से पहले बैरकों में जाने वाला मुख्य द्वार सुनील राठी ने बंद करा दिया था। उसे शक था कि मुन्ना बजरंगी गोली लगने के बाद कहीं बाहर न भाग जाए। चर्चा है कि मेरठ में एक 16 करोड़ की संपत्ति है, जिस पर बजरंगी और सुनील अपना-अपना दावा ठोक रहे थे।

उत्तराखंड में छिपा है जेल में पिस्टल पहुंचाने वाला शख्स!
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद हर रोज नई बात सामने आ रही है। जांच में जुटी उत्तर प्रदेश एसटीएफ को पता चला है कि जेल में मुन्ना को मारने के लिए सुनील राठी ने एक नहीं बल्कि दो पिस्टल इस्तेमाल की थी। मेरठ लिसाढ़ी गेट क्षेत्र के एक शख्स ने जेल में पिस्टल पहुंचाई थी। मेरठ में ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद यह आशंका है कि पिस्टल पहुंचाने वाला शख्स बिजनौर के रास्ते उत्तराखंड में छिप गया है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ से मिले इनपुट से उत्तराखंड पुलिस अलर्ट हो गई है।

खासतौर पर हरिद्वार व कोटद्वार में उसकी तलाश है। रंगदारी के धंधे में हरिद्वार में एकछत्र राज करने वाले सुनील राठी ने बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद पिस्टल, मैग्जीन व कारतूस जेल के गटर में फेंक दिए थे। पुलिस ने पिस्टल, एक अतिरिक्त मैग्जीन व 20 से 22 कारतूस बरामद भी किए हैं। चूंकि मुन्ना को कुल नौ गोलियां मारी गई हैं और पिस्टल की मैग्जीन में कुल छह कारतूस होते हैं। जेल प्रशासन मान रहा है कि मुन्ना के नीचे गिरने के बाद राठी ने उसे उठने का मौका नहीं दिया।

बदली जाएगी राठी की जेल
बागपत जेल में माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या के आरोपित सुनील राठी की जेल बदले जाने की तैयारी है। कारागार मुख्यालय स्तर पर राठी को बागपत जेल से दूसरे कारागार में स्थानांतरित किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसे जल्द शासन को भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि राठी को लखनऊ जिला कारागार अथवा डासना जेल में रखा जाएगा। बागपत जेल में निरुद्ध कुख्यात सुनील राठी दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। सोमवार सुबह सुनील राठी ने माफिया मुन्ना की ताबड़तोड़ गोलियां दागकर हत्या कर दी थी। पुलिस के सामने राठी ने खुद मुन्ना की हत्या करने की बात स्वीकार भी कर ली थी।

दरअसल, बागपत जेल में राठी का काफी दबदबा है। माना जा रहा है कि बागपत जेल में रहते हुए वह हत्याकांड की जांच को भी प्रभावित कर सकता है। उसके खिलाफ गवाह तलाशना भी पुलिस के लिए मुश्किल होगा। एडीजी जेल चंद्रप्रकाश ने मंगलवार को बागपत जेल पहुंचकर लंबी छानबीन की थी, जिसके बाद ही राठी की जेल बदले जाने को लेकर मंथन शुरू हो गया था। अधिकारी इस बात पर भी गहनता से विचार कर रहे हैं कि राठी को किस

जेल में रखा जाना मुफीद होगा। राठी को किसी बड़ी जेल में ही स्थानांतरित किया जाएगा। उसे एकदो दिन में ही दूसरी जेल में भेजे जाने की तैयारी है। बागपत जेल की स्थितियों को देखते हुए वहां जल्द बंदी रक्षकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

पूर्व विधायक शौकीन समेत 50 के बयान दर्ज 
मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में पुलिस की जांच रफ्तार पकड़ रही है। पुलिस ने जेल में बंद दिल्ली के पूर्व विधायक रामवीर शौकीन समेत 50 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। इनमें बंदी और जेल कर्मचारी शामिल हैं। जेल में पिस्टल कैसे पहुंची और घटना में सुनील के अलावा और कौन शामिल रहा, इसका राजफाश नहीं हो पाया है। मुन्ना बजरंगी की हत्या के केस की जांच चार स्तरीय हो रही है। इनमें न्यायिक, मजिस्ट्रेटी, पुलिस और जेल की जांच शामिल है। पुलिस ने कुख्यात सुनील राठी के अलावा विक्की सुन्हैड़ा, दिल्ली के पूर्व विधायक रामवीर शौकीन व अन्य बंदियों के बयान दर्ज किए हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक अधिकारी व बंदी वारदात की जानकारी होने से इन्कार कर रहे हैं। इसके अलावा पुलिस अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगी है। हालांकि अफसर मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal