लखनऊ [शोभित श्रीवास्तव]। प्रवासी पक्षियों को लुभाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार कई अहम कदम उठाने जा रही है। जहां ये पक्षी प्रवास करते हैं, उन स्थलों को और बेहतर विकसित किया जाएगा। साथ ही इनके संरक्षण व संवर्द्धन के लिए स्थानीय समुदायों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश में स्थित प्रमुख वेटलैंड और व्यवस्थित किए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में करीब 500 तरह के पक्षी पाए जाते हैं, इनमें 233 प्रजातियां जल पक्षियों की हैं। इनमें से 118 प्रजातियां प्रवासी पक्षियों की हैं। यह पक्षी मध्य एशियाई फ्लाइवे के जरिए साइबेरिया, रूस, मंगोलिया व सेंट्रल एशिया सहित अन्य जगहों से आते हैं। जब इन जगहों पर भीषण ठंड पड़ती है और पानी भी जम जाता है तब यह पक्षी हजारों किलोमीटर लंबी यात्रा कर ऐसे स्थानों पर जाते हैं, जहां इन्हें अपना वंश बढ़ाना अनुकूल लगता है।

जब यह पक्षी अपने देशों से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर हिमालय की दुर्गम चोटियों के ऊपर से उड़कर आते हैं तो उन्हें सबसे पहले उत्तर प्रदेश में गंगा के मैदान मिलते हैं। इसलिए वे यहां प्रवास करते हैं। यूपी इनके लिए पसंदीदा स्थान है। पिछले दिनों गुजरात में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'कॉप-13' में भी उत्तर प्रदेश ने इसे लेकर विस्तृत प्रजेंटेशन दिया था।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव सुनील पांडेय ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 1.25 लाख वेटलैंड चिह्नित हैं। इनका प्रबंधन और अच्छा करने की तैयारी है। इसके लिए केंद्र सरकार से भी वित्तीय मदद ली जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 25 प्रमुख स्थान ऐसे हैं, जहां प्रवासी पक्षी बहुतायत में आते हैं। प्रवासी पक्षियों के ठहराव स्थलों को और मजबूत किया जाएगा। इन्हें इस तरह बनाया जाएगा कि पक्षियों को यहां सुरक्षित माहौल मिल सके।

लुप्तप्राय प्रजातियों में 10 यूपी की

गंभीर रूप से लुप्तप्राय 17 प्रजातियों में से 10 प्रजातियां उत्तर प्रदेश में पाई जाती हैं। इनमें पिंक हेडेड डक, साइबेरियन क्रेन व ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ऐसी प्रजातियां हैं, जो विलुप्त हो गई हैं। यूपी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजातियों में स्लेंडर-बिल्ड वल्चर, व्हाइट-बैक्ड वल्चर व बंगाल फ्लोरिकन हैं। इसी प्रकार लुप्तप्राय 21 पक्षियों की प्रजातियों में आठ यूपी में पाई जाती हैं। इनमें ग्रेटर एडजुटेंट यूपी में विलुप्त हो गया है। ब्लैक-बेल्ड टर्न व एजिप्टियन वल्चर यूपी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इनके संरक्षण के लिए योजना बनाई जा रही हैं।

Posted By: Umesh Tiwari

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