चैट जीपीटी से बनाई जा रही IPL 2026 की फर्जी टिकटें, लखनऊ में पुलिस ने इकाना स्टेडियम के बाहर अंतरराज्यीय गैंग दबोचा
Fake Tickets of IPL 2026: साइबर सेल के साथ जांच शुरू की और शाम करीब साढ़े चार बजे दोदनखेड़ा चौराहे के पास चारों आरोपितों को दबोच लिया।

चार ठगों को शुक्रवार को सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने साइबर सेल की मदद से गिरफ्तार किया।
HighLights
दिल्ली में फेल होने के बाद लखनऊ में चला खेल, आनलाइन लेते थे धन
इंटरनेट मीडिया से फोटो लेकर कोरल ड्रा पर बनाए टिकट, फिर प्रिंट निकाला
सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने साइबर सेल की मदद से किया चारों को गिरफ्तार
जागरण संवाददाता, लखनऊ। आईपीएल 2026 का जुनून लोगों में इस कदर चढ़ गया है कि लोग असली और फर्जी टिकट का अंतर तक नहीं पहचान पा रहे हैं। लोगों की इस अनभिज्ञता का लाभ के दौरान फर्जी टिकट बेचकर दर्शकों से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के चार ठगों को शुक्रवार को सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने साइबर सेल की मदद से गिरफ्तार किया। सभी आरोपित छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।
पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह ने टिकट की साइज, डिजाइन और पेपर क्वालिटी तक की जानकारी चैट जीपीटी की मदद से जुटाई थी, ताकि टिकट बिल्कुल असली जैसे दिखें। इसके बाद असली टिकटों की फोटो लेकर कोरल ड्रा एप्लीकेशन के जरिए हूबहू नकली टिकट तैयार करते थे।
अपर पुलिस उपायुक्त(एडीसीपी) दक्षिणी आर वसंत कुमार ने बताया कि जालौन के प्रदीप सिंह सात मई को आइपीएल मैच देखने इकाना स्टेडियम पहुंचे थे। स्टेडियम के बाहर उन्होंने दो टिकट खरीदे और एक हजार रुपये आनलाइन ट्रांसफर किए। जब वह गेट पर पहुंचे तो जांच में टिकट फर्जी निकले। इसके बाद उन्होंने थाना सुशांत गोल्फ सिटी में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर साइबर सेल के साथ जांच शुरू की और शाम करीब साढ़े चार बजे दोदनखेड़ा चौराहे के पास चारों आरोपितों को दबोच लिया।
गिरफ्तार आरोपितों में छत्तीसगढ़ के दुर्ग के श्रीकांत बोरकर, नूतन कुमार साहू, राजेंद्र चौधरी और विश्वजीत साहू हैं। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि आर्थिक तंगी और नया आफिस खोलने के लिए पैसों की जरूरत थी। इसी कारण उन्होंने फर्जी आइपीएल टिकट बनाकर बेचने की योजना बनाई। विश्वजीत साहू 2डी और 3डी डिजाइनिंग का काम करता है और उसी ने कोरल ड्रा के जरिए टिकट डिजाइन किए। आरोपितों ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब से असली टिकटों की तस्वीरें डाउनलोड कर उन्हें एडिट किया। फिर चैट जीपीटी से सीखकर कोरल ड्रा की मदद से टिकट तैयार की थी।
दिल्ली में हुए फेल तो लखनऊ पहुंचे
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपित पहले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में भी फर्जी टिकट बेचने पहुंचे थे, लेकिन वहां टिकट की क्वालिटी खराब होने और बारकोड मैच नहीं करने से सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने टिकटों में सुधार किया और छह मई को लखनऊ पहुंचकर होटल में रुके। अगले दिन इकाना स्टेडियम के बाहर टिकट बेचने लगे।
यह माल हुआ बरामद
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 15 जाली आइपीएल टिकट, 14 अधछपे फर्जी टिकट, लैपटाप, चार मोबाइल फोन, पेपर कटर, 170 जीएसएम पेपर शीट, पासबुक, एटीएम कार्ड और घटना में प्रयुक्त रिट्ज कार बरामद की है। पुलिस के अनुसार आनलाइन भुगतान मुख्य रूप से श्रीकांत बोरकर के बैंक खाते में लिया जाता था।
गिरोह के अन्य ठगों के बारे पड़ताल जारी
इंस्पेक्टर सुशांत गोल्फ सिटी राजीव रंजन उपाध्याय ने बताया कि अधिकारियों का कहना है कि आइपीएल मैचों के दौरान फर्जी टिकट बेचने वाले गिरोहों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। साइबर सेल अब आरोपितों के डिजिटल नेटवर्क और अन्य राज्यों में उनकी गतिविधियों की भी जांच कर रही है।
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