यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 30, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
यूपी विधानसभा में अग्रिम जमानत समेत चार विधेयक पारित
यूपी विधानसभा में चार विधेयक पारित हो गए। लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान विधेयक को छोड़ बाकी तीन को विपक्ष ने प्रवर समिति को सौंपने की मांग की।

लखनऊ (जेएनएन)। विधानसभा में गुरुवार को अग्रिम जमानत के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2018, निजी स्कूलों के फीस नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) विधेयक 2018, लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि बढ़ाने के लिए उप्र लोकतंत्र सेनानी सम्मान (संशोधन) विधेयक 2018 और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान विधेयक 2015 में संशोधन, पारित हो गए। लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान विधेयक को छोड़कर बाकी तीन विधेयकों को विपक्ष ने प्रवर समिति को सौंपे जाने की मांग की। इसे लेकर सदस्यों ने अपने अपने तर्क दिए लेकिन, सत्ता पक्ष के बहुमत की वजह से प्रवर समिति को सौंपे जाने की मांग खारिज हो गई।
अग्रिम जमानत की व्यवस्था होगी बहाल
आपातकाल के बाद 1976 में अग्रिम जमानत की व्यवस्था का कानून निरस्त कर दिया गया था। 42 वर्ष बाद इस कानून को बहाल करने के लिए गुरुवार को विधानसभा में दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2018 पारित करने के लिए संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने प्रस्ताव किया। इसे सपा सदस्य उज्ज्वल रमण सिंह और बसपा के रितेश पांडेय समेत कई सदस्यों ने प्रवर समिति को सौंपे जाने की मांग की। उज्ज्वल रमण सिंह का तर्क था, लोकसभा में जो भी विधेयक लाते हैं उसे प्रवर समिति को सौंपा जाता है। उनका कहना था कि अग्रिम जमानत से अपराधियों को मौका मिलेगा जो जनहित में नहीं है। बसपा दल नेता लालजी वर्मा ने प्रवर समिति को सौंपे जाने की मांग करते हुए कहा कि यह विधेयक अपराधियों को बचाने या किसी खास व्यक्ति के लिए लाया गया है। रीतेश पांडेय का कहना था कि अधिकारी के विवेक पर गिरफ्तारी होगी तो वह भयादोहन कर वसूली करेगा। उन्होंने महाराष्ट्र में एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी का तर्क दिया तो सत्ता पक्ष के आनन्द शुक्ला समेत कई सदस्यों ने विरोध जताया। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने इस विधेयक की विशेषता बताई और कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी यह व्यवस्था लागू करने के लिए निर्देश दिए थे। सत्तापक्ष के बहुमत से यह विधेयक पारित हो गया।
फीस नियंत्रण विधेयक को लेकर विपक्ष का विरोध
उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) विधेयक 2018, विधेयक को कांग्रेस दल नेता अजय कुमार लल्लू और बसपा के रितेश पांडेय ने प्रवर समिति को सौंपे जाने की मांग की। सदस्यों ने इसके कई तर्क दिए। अजय लल्लू का कहना था कि फीस नियंत्रण की नियामक समिति मेंं जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को फीस नियंत्रण का अधिकार होना चाहिए। लल्लू ने कहा कि निजी विद्यालय ग्रीष्मावकाश में भी फीस वसूलते हैं। हालांकि रितेश पांडेय का यह भी तर्क था कि कुछ को छोड़कर ज्यादातर प्राइवेट स्कूल नुकसान में चलते हैं। शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने इसकी विशेषता बताई और कहा कि विधेयक में सभी बिंदु निर्धारित हैं। मनमानी करने वालों पर अर्थदंड का भी प्रावधान है। प्रवर समिति को सौंपे जाने का प्रस्ताव निरस्त होने के बाद यह विधेयक भी पारित हो गया।
लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि बढ़ेगी
राजनीतिक पेंशन मंत्री बृजेश पाठक ने उप्र लोकतंत्र सेनानी सम्मान संशोधन विधेयक, 2018 पारित करने का प्रस्ताव रखा। यह विधेयक पारित हो गया। इसमें लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि 15 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के कुलाध्यक्ष होंगे राज्यपाल
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान विधेयक 2015 में संशोधन को भी सपा के उज्ज्वल रमण सिंह ने प्रवर समिति को सौंपे जाने का प्रस्ताव रखा लेकिन, बहुमत इसके विरोध में होने की वजह से संशोधन पारित हो गया। संशोधन के समर्थन में चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि यह विधेयक राज्यपाल के संदेशों के क्रम में है और एसजीपीजीआइ एक्ट के अनुसार संशोधन का फैसला है। यह संस्थान एक विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करेगा। यह स्वायत्त रहे, इसलिए प्रावधान किया गया है। संशोधन के बाद राज्यपाल इसमें कुलाध्यक्ष होंगे जबकि मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पदेन उपाध्यक्ष और वित्त व नियोजन विभाग के भी प्रमुख सचिव इसमें शामिल होंगे। इसके पहले सपा के उज्ज्वल रमण सिंह और बसपा दल नेता लालजी वर्मा समेत कई सदस्यों ने राज्यपाल को कुलाध्यक्ष बनाये जाने की सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। सदस्यों का कहना था कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से क्यों भाग रही है और अपना अधिकार दूसरों को क्यों सौंप रही है। लालजी वर्मा ने कहा कि हर चीज में हठधर्मिता ठीक नहीं है। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के गवर्निंग बाडी का उदाहरण दिया, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री और सांसद होते हैं। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से राज्य सरकार का अधिकार समाप्त जाएगा। वर्मा ने यह भी कहा कि जब कुलाध्यक्ष बाहर का बनता है तो हेड भी बाहर का बन जाता है। वर्मा ने एसजीपीजीआइ की कार्य पद्धति पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि यह आम जनता के अनुकूल नहीं है। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने संशोधन पारित करने का प्रस्ताव रखा। सत्तापक्ष के बहुमत से यह पारित हो गया।
