लखनऊ में फॉर्मेलिन से भरा टैंकर पलटा, केमिकल फैलने से 10 हजार लोगों पर असर; आंख-नाक में होने लगी जलन
लखनऊ में किसान पथ पर एक फॉर्मेलिन रसायन से भरा टैंकर पलटने से केमिकल का रिसाव हो गया।

बीकेटी में किसान पथ पर गैस रिसाव के बाद एसडीआरएफ फायर ब्रिगेड और और पुलिस टीम नियंत्रण के लिये। जागरण
HighLights
किसान पथ पर फॉर्मेलिन रसायन से भरा टैंकर पलटा।
केमिकल रिसाव से 10,000 लोगों को आंख-नाक में जलन।
पुलिस, फायर, SDRF ने मिलकर रिसाव को रोका।
लखनऊ में फार्मेलिन से भरा ट्रक पलटा, केमिकल फैलने से 10000 की आबादी की आंख-नाक में होने लगी जलन
जागरण संवाददाता, लखनऊ। किसान पथ पर मानपुर बाना और नगुवामऊ गांव के बीच में सोमवार शाम टायर फटने से फॉर्मेलिन रसायन से भरा टैंकर पलट गया। इसके रिसाव होने से आसपास के गांवों के लोगों की आंख, नाक, गला और त्वचा में जलन होने लगी। पुलिस ने पांच सौ मीटर पहले से किसान पथ पर आवाजाही रोक दी। वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से गुजारा। अग्निशमन और एसडीआरएफ टीम ने रसायन का रिसाव और फैलाव रोका।
ऐसे हुआ हादसा
संडीला, हरदाई से फॉर्मेलिन रसायन लेकर सोमवार को एक टैंकर गुडंबा की प्लाईवुड फैक्ट्री में जा रहा था। रास्ते में किसान पथ पर मानपुर बाना और नगुवामऊ के पास उसका टायर फट गया। इससे टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर से रसायन का रिसाव होने लगा। इसका असर करीब पांच सौ मीटर तक हुआ।
आसपास के इलाके मामपुर बाना, भैंसामऊ, गाजीपुर, एसआर इंस्टीट्यूट का हास्टल व निजी हास्टलों में रहने वाले करीब 10 हजार लोग प्रभावित हुए। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। एसीपी अंकित बंसल, थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे।
पांच सौ मीटर दूर से रोकी गई आवाजाही है
रसायन के फैलाव को देखते हुए अधिकारियों ने घटना स्थल से पांच सौ मीटर दोनों से आवाजाही रोक दी। अग्निशमन कर्मियो और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। दोनों टीमों ने करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत कर रसायन का रिसाव और फैलाव रोका। इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह ने बताया कि कोई जनहानि नहीं हुई है।
फॉर्मेलिन रसायन के बारे में जानिए
फॉर्मेलिन मूल रूप से फार्मेल्डिहाइड गैस और पानी का एक शक्तिशाली रासायनिक मिश्रण (तरल रसायन) है, जिसका मुख्य काम बैक्टीरिया, फंगस और वायरस को मारकर जैविक चीजों को सड़ने से बचाना है। इसका उपयोग मेडिकल प्रयोगशालाओं में शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने, अस्पतालों को सैनिटाइज करने और प्लास्टिक, गोंद व प्लाईवुड जैसे औद्योगिक उत्पाद बनाने में किया जाता है। यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय के अधीक्षक डाॅ. सुमित महराज ने बताया फॉर्मेलिन रसायन का असर जितने दूर तक होगा, वहां तक प्रभावित व्यक्ति की आंख, नाक, गले और त्वचा में जलन होगी। बाद में शरीर की त्वचा पर चकत्ते पड़ सकते हैं।
