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लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के दो बजट को पेश करने वाले वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार के एक दिन पहले इस्तीफा दे दिया है। वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। राजेश अग्रवाल ने स्वास्थ्य कारणों और बढ़ती उम्र को देखते हुए उन्होंने इस्तीफा सौंपा है।

बरेली की कैंट विधानसभा से बीते 25 वर्ष से लगातार विधायक 76 वर्षीय राजेश अग्रवाल ने इस्तीफा का कारण अपनी बढ़ती उम्र बताया है। बुधवार को होने वाले योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार से पहले वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल के इस्तीफा से खलबली मच गई है। इसी बीच उन्होने एक नोट जारी कर कारण भी स्पष्ट कर दिया है। उन्होने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है।

राजेश अग्रवाल ने दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। स्वास्थ्य कारणों और बढ़ती उम्र को देखते हुए उन्होंने इस्तीफा सौंपा है। अभी तक उनके इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं हुआ है। 76 वर्ष के राजेश अग्रवाल बरेली कैंट से लगातार बीजेपी विधायक रहे हैं। बरेली में भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक हैं।  2017 के विधानसभा चुनाव में वह बरेली कैंट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से पढ़े राजेश अग्रवाल का जन्म 18 सितंबर 1943 को हुआ था। वे पेशे से व्यापारी हैं और 2004 से 2007 तक वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के डिप्टी स्पीकर भी रहे।

इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि अब वे 76 वर्ष के होने जा रहे हैं। पार्टी की रीती-निति के अनुसार अपना त्याग पत्र भाजपा नेतृत्व को दो दिन पहले ही सौंप चुके हैं। उन्होंने लिखा है कि उनकी जगह कुछ नए और योग्य चेहरों को काम करने का अवसर दिया जाए. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ पार्टी संगठन के लिए काम करते रहने की बात कही है। 

धर्मपाल, अर्चना और अनुपमा का भी इस्तीफा 

यूं तो मंगलवार की दोपहर से ही कई मंत्रियों के इस्तीफे की खबर सोशल मीडिया पर चलने लगी लेकिन मंत्रियों ने खुद ही पहल कर इसे खारिज किया। सिर्फ वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल, सिंचाई म॔त्रो धर्मपाल सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल और खनन मंत्री अर्चना पांडेय ने मंगलवार को अपना इस्तीफा सौंपा। धर्मपाल, अर्चना और अनुपमा को भाजपा मुख्यालय में प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने तलब किया था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने तो दो दिन पहले ही एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत के चलते परिवहन मंत्री पद से अपना त्यागपत्र भेज दिया था। मंगलवार देर रात पांचों मंत्रियों के इस्तीफे मंजूर कर लिए गए। सांसद चुने जाने के बाद सत्यदेव पचौरी, प्रोफेसर एसपी बघेल और प्रोफेसर रीता बहुगुणा जोशी के इस्तीफे और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के मंत्रिमंडल से बर्खास्त किये जाने से चार कैबिनेट मंत्री के पद पहले से ही रिक्त हैं।

कुछ और मंत्रियों की छुट्टी तय 

योगी की कसौटी पर खरा न उतरने वाले कुछ और मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है। इनमें कैबिनेट मंत्री से लेकर राज्यमंत्री तक शामिल हैं। वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपनी अत्यधिक उम्र का हवाला देकर त्यागपत्र दिया है। तबादलों को लेकर अनुपमा की ऊपर तक शिकायत हुई थीं। मुख्यमंत्री ने उनके द्वारा किये तबादले रद कर दिये थे। इसके अलावा मुकुट बिहारी वर्मा, नंदगोपाल गुप्ता नंदी, धर्मपाल सिंह, स्वाती सिंह, अर्चना पांडेय, चेतन चौहान, मनोहर लाल कोरी समेत कई और भी मंत्रियों को हटाये जाने की सोशल मीडिया पर चर्चा चलती रही लेकिन इसकी कहीं पुष्टि नहीं हुई।

Posted By: Dharmendra Pandey

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