लखनऊ, जेएनएन। ज्यादा संसाधन पाने की दरकार में पंद्रहवें वित्त आयोग की ओर टकटकी लगाये देख रहे उत्तर प्रदेश के सामने उद्योग-विनिर्माण में आयी सुस्ती और क्षेत्रीय असमानता की चुनौतियां भी हैं। उत्तर प्रदेश के तीन दिनी दौर पर पहुंचे 15वें वित्त आयोग ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। आयोग की टीम चार दिवसीय उत्तर प्रदेश के दौरा पर है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह का स्वागत किया।

15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह की अध्यक्षता में वित्त आयोग, इसके सदस्य और वरिष्ठ अधिकारियों ने आज उत्तर प्रदेश के ग्रामीण स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की। प्रतिनिधि आयोग को उनके सिफारिशें पेश किया।

15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह ने आज लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। इससे पहले शनिवार व रविवार को वित्त आयोग ने वाराणसी का दौरा किया जबकि सोमवार को लखनऊ में वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। आयोग ने माना कि उत्तर प्रदेश ने वित्त के क्षेत्र में प्रदर्शन सुधारा है। इसके साथ ही कुछ अन्य में उसने नए प्रयोग किए हैं जिन पर आयोग ने गौर फरमाया है।

उत्तर प्रदेश के खाते में कुछ उपलब्धियां भी हैं। कारोबार में सहूलियत देने के मामले में उप्र ने छलांग लगाते हुए 2016-17 के दौरान देश में 14वें से 12वां स्थान हासिल किया। प्रदेश में सूक्ष्म, लघु व मध्यम दर्जे के उद्योगों का मजबूत आधार है। प्रदेश में 89.99 लाख एमएसएमई संचालित हैं जो कि देश के कुल छोटे उद्योगों का 14.2 फीसद है। एमएसएमई सेक्टर प्रदेश में रोजगार मुहैया कराने का बड़ा स्रोत है। हालांकि राज्य में एमएसएमई सेकटर को क्रेडिट, तकनीकी, कच्चा माल और मार्केटिंग के मोर्चों पर सुदृढ़ करने की जरूरत है। पर्यटन क्षेत्र में भी उप्र में अपार संभावनाएं हैं।

पंद्रहवें वित्त आयोग ने उद्योगों की स्थापना के लिए शुरू किये गए निवेश मित्र पोर्टल, युवाओं को रोजगार देने के लिए संचालित मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, परंपरागत हस्तशिल्पों को प्रोत्साहन देने के लिए संचालित विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना आदि पर भी गौर फरमाया है।

चुनौतियों को लें तो प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में औद्योगिक व विनिर्माण क्षेत्र की जो हिस्सेदारी वर्ष 2011-12 में 26.7 प्रतिशत थी, वह 2017-18 में घटकर 22.8 प्रतिशत रह गई है। इससे रोजगार सृजन पर प्रभाव पडऩा तय है। क्षेत्रीय असंतुलन भी उप्र की बड़ी समस्या है। ऊर्जा, औद्योगिक विकास और परिवहन जैसे प्रमुख सेक्टरों में पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र अन्य इलाकों की तुलना में पिछड़े हैं। बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ऊर्जा सेक्टर में पूर्वी उप्र सूबे के अन्य क्षेत्रों की तुलना में पिछड़ा है। 2016-17 के आंकड़ों के अनुसार पूर्वी उप्र में प्रति व्यक्ति बिजली उपभोग 239.82 किलोवाट आवर था जो कि प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में सबसे कम था। प्रति एक लाख जनसंख्या पर रजिस्टर्ड ïफैक्ट्रियों में कार्यरत कार्मिकों की संख्या 2013-14 में बुंदेलखंड में जहां 101.19 थी, वहीं पूर्वांचल में यह 110.8 थी। यह संकेत है कि यह दोनों क्षेत्र औद्योगिक विकास में अन्य क्षेत्रों की तुलना में पिछड़े हैं।

गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों के पसीने छूट गए

वाराणसी में शनिवार व रविवार को 15वें वित्त आयोग की टीम ने एसटीपी से संबंधित कई प्रश्न पूछे, जिस पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों के पसीने छूट गए। गंगा व वरुणा में गिर रहे सीवर नालों को बंद करने की अंतिम तिथि पूछा तो जवाब मिला मार्च 2020 तक। जब पूछा गया कि शाही नाला और उसकी ब्रांच व अन्य नाले कब टैप होगा तो अधिकारी अवाक रह गए। इसके बाद प्रदेश जल निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक संजय कुमार खत्री ने कहा इसके लिए प्राक्कलन रिपोर्ट तैयार हो गई है। निविदा प्रक्रिया शुरू है। 2020 के अंत तक यह कार्य हो जायेगा। वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह के नेतृत्व में दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन रविवार को दोपहर बाद टीम एसटीपी दीनापुर पहुंची थी। आयोग ने 140 और 80 एमएलडी के प्लाट की कार्यप्रणाली से संबंधित तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं पर लगभग आधे घटे तक विस्तारपूर्वक अधिशासी अभियंता विवेक सिंह से पूछताछ की। एक सदस्य ने जब पूछा कि गंगा में स्नान योग्य पानी कब तक हो जायेगा, तो अधिकारी चुप्पी साध गए।

सदस्यों ने गंगा के वाराणसी में प्रवेश करने और बाहर जाने पर जल की गुणवत्ता बनाए रखने को कहा। टीम ने शोधन संयंत्रों की कार्य कुशलता, क्षमता के अनुरूप संचालन, आसपास गावों के लोगों की प्रतिक्रिया पर भी सवाल पूछा। बिजली उत्पादन, प्लांट संचालन में खर्च होने वाली बिजली, शोधित जल में बीओडी व टीएसएस की मात्रा भी पूछा। उन्होंने एसटीपी द्वारा शोधित जल का नमूना भी देखा। इसके पूर्व टीम के सदस्यों ने लालपुर स्थित टीएफसी का निरीक्षण व सारनाथ का भ्रमण किया। शाम को सभी लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

आने वाला समय यूपी टूरिज्म का : एनके सिंह

15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह का कहना है कि सारनाथ में हिन्दू, जैन और बौद्ध तीनों धर्मो की प्राचीन परम्परा है। यह देश के गौरव की बात है। सारनाथ में पुरातत्व स्थलों के भ्रमण के दौरान उन्होंने कहा कि देश में देसी-विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब पर्यटकों में भी जागरूकता बढ़ गई है। आने वाला समय उत्तर प्रदेश टूरिज्म का होगा। चेयरमैन सपत्नीक सुबह साढ़े 11 बजे पुरातात्विक संग्रहालय पहुंचे। सहायक पुरातत्वविद् डा.नीतेश सक्सेना ने उन्हें पुरातात्विक उत्खनित स्थलों, पुरातात्विक संग्रहालय आदि का अवलोकन कराया। संग्रहालय में रखे राष्ट्रीय चिह्न शीर्ष सिंह को देखकर वे काफी अभिभूत हुए और बोले यही है देश की धरोहर।

Posted By: Dharmendra Pandey

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