लखनऊ (जेएनएन)। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के गन्ना का समर्थन मूल्य बढ़ाने के बाद भी प्रदेश के किसान नाराज है। लखनऊ में आज विधान भवन के सामने किसानों ने गन्ना जलाने के साथ ही कहा कि सरकार ने हमारे साथ मजाक किया है।

प्रदेश की राजधानी में विधान भवन के सामने एकत्र दो दर्जन से अधिक किसानों ने आज गन्ना जलाकर इसके समर्थन मूल्य पर अपना विरोध दर्ज कराया। योगी आदित्यनाथ सरकार ने कल गन्ने का समर्थन मूल्य 10 रुपया प्रति क्विंतल बढ़ा दिया। उसको लेकर किसानों का गुस्सा फूट गया। नारेबाजी कर किसानों ने सरकार के कल घोषित गन्ना, धान और आलू मूल्य पर पुनर्विचार कर संकल्प पत्र में किए गए वादे के अनुसार गन्ना 450, धान 2500 व आलू का मूल्य एक हजार रुपये कुंतल घोषित करने की मांग की। नाराज किसानों ने मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

पुलिस ने बेरिकेडिंग कर किसानों को विधानसभा गेट के सामने एकत्र होने से रोक दिया। इसके बाद किसानों ने भाजपा कार्यालय के पास कुंतलों गन्ना व धान की होली जलाकर प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन के बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट का रुख किया। कलेक्ट्रेट गेट पर एकत्र होकर किसानों ने पुन: गन्ना व धान की होली जताई।  सरकार के फैसले के खिलाफ आज भारतीय किसान यूनियन के तमाम नेताओं ने विधान भवन के सामने गन्ने को जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस मौके पर बड़ी संख्या में किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया। यहां पर किसानों के इस विरोध को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती थी।

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योगी सरकार ने गन्ना की समर्थन मूल्य को 10 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है। प्रति किलो 10 पैसे की कीमत की बढ़ोत्तरी की गई है। अब योगी सरकार गन्ना किसानों से गन्ना 305 रुपए प्रति क्विंतल की जगह 315 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है।

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अब किसानों को 3.05 रुपए प्रति किलो की बजाए 3.15 रुपए प्रति किलो के हिसाब से गन्ने की कीमत मिलेगी, हालांकि गन्ना उद्योग ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। अब किसान सरकार के इस फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं।

भारतीय किसान यूनियन के नेता हरिनाम सिंह वर्मा ने कहा कि प्रति कुतंल 10 रुपए बढ़ोत्तरी कर किसानों के साथ सरकार ने भद्दा मजाक किया है। योगी सरकार का व्यवहार भी ठीक वैसा ही है, जैसे पिछली सरकारों का व्यवहार रहा है। गन्ना मूल्यों के दामों में बढ़ोत्तरी महंगाई दर में बढ़ोत्तरी की तुलना में काफी कम हैं।

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यूनियन के मंडल अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा ने कहा प्रदेश सरकार का घोषित गन्ना मूल्य नाकाफी है। चीनी मिलों से सरकार की मिलीभगत के चलते गन्ना किसानों के हितों पर कुठाराघात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के पेराई सत्र 2017-18 के लिए गन्ने का मूल्य घोषित किया गया।

गन्ना मूल्य में दस रुपये की वृद्धि कर गन्ना किसानों के साथ भद्दा मजाक किया गया है। मूल्य में वृद्धि तुलनात्मक रूप से महंगाई दर में हुई वृद्धि से कम है। प्रदेश की करीब 50 लाख बेबस गन्ना किसानों में सरकार के प्रति रोष है। वर्तमान सत्र में रिकवरी के मामले में उप्र ने सभी राज्यों को पीदे छोड़ दिया है, जिसका लाभ भी चीनी मिल मालिकों को है। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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