राजीव दीक्षित, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विभिन्न कंपनियों और सरकारी व अर्धसरकारी विभागों में सेवाप्रदाता एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले कार्मिकों की कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) अंशदान की कटौती नहीं की जा रही है।

कई कंपनियों की ओर से ईपीएफ की कटौती तो की जा रही है, लेकिन इस धनराशि को कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते में जमा नहीं किया जा रहा है। कई मामलों में नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का अंशदान कर्मचारी के ही वेतन से काटा जा रहा है। वहीं कई मामलों में तो सरकारी व अर्धसरकारी विभागों की ओर से सेवाप्रदाता एजेंसियों को आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले कार्मिकों के ईपीएफ अंशदान का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन एजेंसियां कर्मचारियों के खातों में अंशदान को जमा न कर इसे डकार रही हैं। कर्मचारियों को उनके ईपीएफ खाते में जमा धनराशि की जानकारी भी नहीं दी जा रही है।

खुद मुख्य सचिव की ओर से इस बारे में भविष्य निधि आयुक्त को पत्र लिख कर यह जानकारी देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दरअसल श्रम एवं सेवायोजन विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सरकार के कई विभागों, प्रतिष्ठानों और उपक्रमों में भारी संख्या में नियोजित नियमित, दैनिक वेतनभोगी, कैजुअल, कॉन्ट्रैक्चुअल व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को ठेकेदार/आउटसोर्सिंग एजेंसियां कानून का खुला उल्लंघन कर भविष्य निधि, पेंशन व बीमा लाभ की सुविधाओं से वंचित कर रही हैं।

मुख्य सचिव के पत्र का हवाला देकर क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त अनिल कुमार प्रीतम ने प्रदेश के 27 जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्राधिकार में स्थित कंपनियों व प्रतिष्ठानों में कार्यरत प्रत्येक नियमित, दैनिक वेतनभोगी, कैजुअल, कॉन्ट्रैक्चुअल व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का ईपीएफ कार्यालय में पंजीयन सुनिश्चित कराएं। इन कर्मचारियों के यूएएन को उनकी आधार संख्या और बैंक खाता संख्या से लिंक कराने का निर्देश दिया है। साथ ही जिलाधिकारियों के अधीनस्थ विभागों में सेवाप्रदाता एजेंसियों के माध्यम से नियोजित प्रत्येक कर्मचारी का विवरण तलब किया है।

ऐसी सभी सेवाप्रदाता एजेंसियों के नाम तथा विभाग से किये गए अनुबंध की प्रति भी मांगी है। एजेंसियों को दी गई धनराशि और भविष्य निधि राशि का विवरण भी तलब किया है। भविष्य निधि अंशदान जमा करने में अनियमितता बरतने वाली एजेंसियों का ब्योरा भी मांगा है। उन्होंने सरकारी और अर्धसरकारी विभागों के विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वे ऐसी अनियमितताओं की सूचना सीधे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को उपलब्ध कराएं।

इन जिलों के डीएम से मांगी गईं जानकारियां

आगरा, मथुरा, मैनपुरी, बरेली, झांसी, लखनऊ, कानपुर, हरदोई, फीरोजाबाद, अंबेडकरनगर, बांदा, बलरामपुर, बहराइच, बदायूं, औरैया, अमेठी, अलीगढ़, बाराबंकी, आजमगढ़, बागपत, बस्ती, बिजनौर, चित्रकूट, बलिया, चंदौली, बुलंदशहर और प्रयागराज।

Posted By: Umesh Tiwari

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