लखनऊ (जेएनएन)। करीब 22 करोड़ की सर्वाधिक आबादी अपने प्रदेश की समस्या है तो इस आबादी में युवाओं की सबसे बड़ी संख्या मानव संसाधन भी। इन युवाओं को अपनी योग्यता और हुनर के अनुसार स्थानीय स्तर पर रोजगार मुहैया कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। ऐसा होने पर ये खुद तो खुशहाल होंगे ही, प्रदेश की तरक्की में भी अपना योगदान दे सकेंगे। बजट चाहे किसी भी क्षेत्र का हो सरकार ने इस पर भरपूर ध्यान दिया है। हर क्षेत्र में हर साल कितने रोजगार का लक्ष्य है, यह पहले से ही तय है। इन क्षेत्रों में बजट का आवंटन कर सरकार इसे अमली जामा पहनाना चाहती है।

योजनाओं से जोड़कर वित्तीय पोषण 

मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, एक जिला एक उत्पाद, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, खादी एवं ग्रामोद्योग, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग, पशुपालन और मछली पालन आदि से जुड़ी तमाम योजनाओं और इनमें आवंटित रकम के पीछे सरकार का यही मकसद है। इन योजनाओं को रफ्तार देने के लिए सरकार इनको अलग-अलग सेक्टरों में बांटेगी और उसी अनुसार इनको केंद्र के मुद्रा, स्टार्ट अप और स्टैंड अप आदि योजनाओं से जोड़कर उनका वित्तीय पोषण करेगी। तैयार उत्पाद गुणवत्ता के और बाजार की मांग के अनुरूप हों इसके लिए हर विभाग को कौशल विकास के जरिये लाभार्थियों का हुनर निखारने का निर्देश पहले ही दिया जा चुका है। इस दिशा में काम भी चल रहा है। बजट के बाद इसमें और तेजी आएगी। 

वन-पर्यावरण पर भी फोकस

बजट में सरकार ने इसमें 1024 करोड़ रुपये का बजट दिया है। यह बजट पिछले वर्ष के मुकाबले 20.63 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार ने सब मिशन ऑन एग्रोफोरेस्ट्री योजना शुरू की है। इस कृषि वानिकी के जरिये विशेष रूप से छोटे किसान व आदिवासियों की आजीविका के संसाधन विकसित किए जाएंगे। सरकार ने इस योजना में 20 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।योगी सरकार ने हाल ही में आमजन व खासकर वनवासियों को ध्यान में रखकर नई वन नीति जारी की है। आम लोगों को जरूरत के मुताबिक पेड़ काटने का भी अधिकार दे दिया है। यह बजट भी इस नीति को सफल बनाने की दिशा में बढ़ाया गया कदम है। सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए 6.47 करोड़ रुपये का बजट दिया है। सरकार ने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बजट की कमी आड़े नहीं आएगी। 

ईको पर्यटन एवं जैव विविधता केंद्र स्थापना

प्रदेश सरकार राजधानी लखनऊ में स्थित कुकरैल वन क्षेत्र में ईको पर्यटन एवं जैव विविधता केंद्र स्थापित करने जा रही है। इसके जरिये लोगों को पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने पांच करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह ऐसा केंद्र होगा जहां एक ही जगह जैव विविधता के सभी स्वरूप देखने को मिल जाएंगे। वन एवं पर्यावरण मंत्री दारा सिंह चौहान ने बतााया कि यह बजट सभी वर्गों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जहां तक वन एवं पर्यावरण की बात है इसमें भी खासकर वनवासी जो जंगलों में रहते हैं उनकी आजीविका के लिए नई योजना लांच की गई है। पर्यावरण संरक्षण के लिए भी सरकार कई नई योजनाएं शुरू करेगी। 

 

Posted By: Nawal Mishra