लखनऊ, जेएनएन। यह कोई पहला मामला नहीं है जब नेपाली हाथियों का झुंड इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों में आया हो। सीमा पर नेपाली क्षेत्र में जंगल के उजडऩे के कारण वर्षों से हाथी दुधवा आ रहे हैं। धीरे-धीरे अब इनकी संख्या 200 के पार पहुंच चुकी है। अक्सर ये हाथी उग्र होने पर आबादी क्षेत्र में आशियाना और फसलों को उजाड़ देते हैं। कई बार तो इनके हमले में किसानों की मौत तक हो चुकी है। तराई के लिए नेपाली हाथियों का उत्पात बड़ी समस्या है लेकिन, पीडि़तों को मुआवजा देने के अलावा वन विभाग के पास इन हाथियों से निपटने का कोई ठोस प्रबंध नहीं है। 

इन दिनों करीब 20-22 नेपाली हाथियों का एक दल पीलीभीत के हरिनगर रेंज से होते हुए मैलानी रेंज के जंगलों में पहुंचा हुआ है। हाथियों ने यहां किसानों की फसल उजाड़ दी और वनकर्मियों पर हमलावर हुए हैं। वन विभाग इन हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखने के सिवाए कुछ भी कर पाने में असहाय नजर आ रहा है। अधिकारियों की मानें मैलानी क्षेत्र में नेपाली हाथियों का झुंड करीब 10 वर्षों के बाद पहुंचा है लेकिन, दुधवा और कर्तनिया घाट में सैंकड़ों हाथी वर्षों से ठिकाना बना कर रह रहे हैं। उन्हें दुधवा की प्राकृतिक वन संपदा खूब भा रही है। दुधवा में आसानी से भोजन, पानी और प्राकृतिक वासस्थल मिलने के कारण इनका कुनबा फलफूल रहा है। 

2018 में जानलेवा हाथियों ने किसानों की ले ली जान 

  • दिसंबर 2018 में लुधौरी रेंज के तकिया जंगल में हाथियों ने दरेरी गांव के किसानों पर हमला कर दिया था, जिसमें सात किसान जख्मी हो गए थे। 
  • दिसंबर 2018 में ही हाथियों ने तकिया गांव के 60 वर्षीय बुजुर्ग को घास काटते समय पटक कर मार डाला था। 
  • दिसंबर 2018 में ही तिकुनियां के इंडो-नेपाल बॉर्डर पर मोहाना नदी पार कर खेत में काम कर रहे एक युवक पर हमला कर हाथियों ने मार डाला था। 
  • वर्ष 2013 में हाथियों ने जंगल से निकल कर संपूर्णानगर इलाके में फसलों को रौंद दिया और एक किसान की जान ले ली। 

लहन पीने जंगल से बाहर आते हैं हाथी 

दुधवा व अन्य जंगलों में सीमावर्ती गांवों के लोग कच्ची शराब बनाने के लिए छिपाकर लहन रखते हैं। अक्सर हाथी लहन को पीकर नशा होने पर उत्पात मचाते हैं। लहन पीने का सिलसिला वर्षों से चलता आ रहा रहा है। 

जिम्मेदार की सुनिए 

डीडी बफरजोन डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि दुधवा व कर्तनिया घाट में करीब 200 नेपाली हाथी मौजूद हैं। ये हमेशा झुंड में रहते हैं। जंगलों से इन हाथियों को खदेड़ पाना आसान नहीं है और ऐसा किया भी नहीं जाता है। इनकी निगरानी के अलावा वन विभाग कुछ कर नहीं सकता है। 

 

Posted By: Anurag Gupta

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