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यूपी में बिजली संकट गहराया: सात महीने में 1912 हेल्पलाइन पर शिकायतें चार गुना बढ़ीं

Published: Mon, 21 Sep 2026 09:28 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति के सरकारी दावों के विपरीत, पावर कॉरपोरेशन की 1912 हेल्पलाइन पर सात महीनों में शिकायतें ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. सात महीनों में 1912 हेल्पलाइन पर शिकायतें चार गुना बढ़ीं।

  2. 70% से अधिक शिकायतें बिजली कटौती, खराब आपूर्ति से संबंधित।

  3. दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 तक शिकायतें साढ़े तीन गुना बढ़ीं।

अंशू दीक्षित, लखनऊ। प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ा फासला नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सरकार बिजली व्यवस्था में सुधार के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पावर कॉरपोरेशन का टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1912' उपभोक्ताओं की बढ़ती समस्याओं की गवाही दे रहा है।

सूचना का अधिकार के तहत मिले आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में सात महीनों के भीतर बिजली से जुड़ी शिकायतें करीब चार गुना तक बढ़ गई हैं। इनमें से 70 फीसदी से ज्यादा शिकायतें सीधे तौर पर बिजली कटने और खराब आपूर्ति से जुड़ी हैं, जिसने विभाग की तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यानी देखा जाए तो सामने आए साफ आंकड़े धुंधली हकीकत को बयां कर रहे हैं।

हालांकि सिक्के का एक पहलू यह भी है कि 1912 पर शिकायत करने का आसान माध्यम एक जनवरी 2026 से पूरे प्रदेश को सुलभ हुआ इसलिए भी यह आंकड़ा बढ़ा है। आइए डालते हैं एक नजर...

मध्यांचल डिस्काम में कैलेंडर वर्ष में 12,61,032 शिकायतें दर्ज

वृंदावन कॉलोनी के सेक्टर चार में रहने वाले मनोज चौहान के सर्विस केबल में गड़बड़ी के कारण घर में बिजली नहीं आ रही थी। हेल्पलाइन नंबर 1912 पर शिकायत की। 20 से 25 मिनट में स्टाफ मौके पर पहुंच गया और तार में लगे कर्बन को हटाकर बिजली चालू कर दी।

गोमती नगर के विवेक खंड तीन निवासी अशोक का बिल नहीं आया था, 1912 पर फोन किया तो बिल दूसरे दिन मोबाइल पर आ गया। इसी तरह विकास खंड निवासी शकुंतला के पुराने मीटर की रीडिंग नहीं हो रही थी, हेल्पलाइन पर शिकायत करने पर दूसरे दिन मीटर रीडर आकर बिल दे गया।

यह कुछ उदाहरण हैं जो बताते हैं कि पिछले सात माह में हेल्पलाइन नंबर 1912 पर शिकायतें खूब हुई। शिकायतों का ग्राफ दिसंबर 2025 में 5,62,177 था, जो मध्यांचल में कुल उपभोक्ता (एक करोड़) की शिकायतों के ग्राफ के अनुपात में 5.62 प्रतिशत था। जुलाई 2026 में शिकायतकर्ताओं की संख्या 20,17,302 हो गई, इनमें 70 प्रतिशत शिकायतें बिजली संकट से जुड़ी थी। यह ग्राफ कुल उपभोक्ता (3.75 करोड़) की संख्या के अनुपात में 5.37 प्रतिशत है।

20 लाख शिकायतों में 70 प्रतिशत तो केवल बिजली आपूर्ति से संबंधित

दैनिक जागरण को यह जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा उपलब्ध कराई गई है। सूचना अधिकार के तहत बताया गया कि एक कैलेंडर वर्ष में मध्यांचल में 12,61,032 शिकायतें दर्ज हुई इसमें चालीस प्रतिशत शिकायतें लखनऊ जिले की है। यहां उपभोक्ताओं की संख्या 15 लाख है।

कह सकते हैं कि हर तीसरे उपभोक्ता ने बिजली संकट व अन्य समस्याओं की शिकायत दर्ज कराई, यहां वर्टिकल बिजली व्यवस्था भी नवंबर 2025 से लागू है, शिकायत बढ़ने का कारण यह भी है।

शिकायतों की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी मई 2026 में देखने को मिली

वहीं उत्तर प्रदेश के सभी बिजली डिस्कॉम से मार्च 2026 आठ लाख उपभोक्ताओं ने अपनी समस्या 1912 पर बताई। यही नहीं शिकायतों की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी मई 2026 में देखने को मिली। इस माह 18 लाख शिकायतें आई। इसमें सत्तर प्रतिशत से अधिक बिजली आपूर्ति से जुड़ी थी। इसके दो माह बाद जुलाई में शिकायतों का आंकड़ा बढ़कर 20,17,302 हो गया। कह सकते हैं कि दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच शिकायतों का ग्राफ साढ़े तीन गुना से अधिक बढ़ा।

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1912 के सेंटर को केंद्रीयकृत करके एक जनवरी 2026 में खोला

यूपीपीसीएल ने लखनऊ व नोएडा में हेल्पलाइन नंबर 1912 के सेंटर को केंद्रीयकृत करके एक जनवरी 2026 में खोला। शुरुआत में शिकायतों का निस्तारण धीमी गति से हो रहा था, लेकिन यूपीपीसीएल की बढ़ती मानीटरिंग व अभियंताओं की जवाबदेही से शिकायतों का निस्तारण भी तेज हो गया। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निदेशक वाणिज्य रजत जुनेजा बताते हैं कि पहले पचास हजार 40 हजार शिकायतें प्रतिदिन आती थी, अब यह ग्राफ नब्बे हजार तक पहुंच गया है। वहीं आरटीआइ के तहत उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस पूरी व्यवस्था पर एक साल में छह करोड़ पच्चीस लाख का खर्च है और फायदा पौने चार करोड़ उपभोक्ताओं को मिल रहा है।