लखनऊ, राज्य ब्यूरो। भीषण गर्मी में जहां बिजली की मांग बढ़ती जा रही है वहीं तकनीकी खामियों से ही बिजली की उपलब्धता लगभग दो हजार मेगावाट घट गई है। ऐसे में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही कस्बों और बुंदेलखंड में तय शेड्यूल से दो घंटे अधिक बिजली की कटौती करनी पड़ रही है।

राज्य में इनदिनों बिजली की रिकार्ड मांग 25,500 मेगावाट पहुंच रही है। पावर कारपोरेशन प्रबंधन मांग को ध्यान में रखते हुए तय शेड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति करने की कोशिश में जुटा भी है लेकिन पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में कई बिजली उत्पादन की यूनिटें तकनीकी गड़बड़ी के चलते बंद हो गई हैं। बंद होने वाली यूनिटों में बारा की 660 मेगावाट व रोजा की 300 मेगावाट की यूनिट है।

इसी तरह केंद्रीय सेक्टर की यूनिटों के बंद होने से ऊंचाहार तापीय परियोजना से 116 मेगावाट और सिंगरौली से 279 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। मेजा की 660 मेगावाट की यूनिट भी बंद है। कई यूनिटों से क्षमता से कम बिजली उत्पादित हो रही है। 410 मेगावाट की दो अन्य यूनिटें भी बंद हैं जिनसे जून में ही बिजली मिलने की उम्मीद है।

विभागीय प्रमुख सचिव और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष एम. देवराज ने बताया कि पावर एक्सचेंज से भी अतिरिक्त बिजली नहीं मिल पा रही है क्योंकि वहां बिजली की दर बहुत ज्यादा है। ऐसे में तय शेड्यूल के अनुसार गांवों को 18 घंटे, तहसील स्तरीय कस्बों को 21.30 घंटे और बुंदेलखंड को 20 घंटे बिजली आपूर्ति संभव नहीं हो पा रही है। रात में दो घंटे तक अतिरिक्त कटौती हो रही है।

स्थानीय स्तर पर ओवर लोडिंग और जर्जर तारों के कारण बड़े शहरों में भी कई जगह बिजली की निर्बाध आपूर्ति नहीं हो पा रही है। देवराज ने बताया कि बंद यूनिटों के कार्यों को युद्धस्तर पर करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनसे जल्द से जल्द उत्पादन शुरू हो सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि 20 मई से बंद यूनिटों से उत्पादन शुरू हो जाएगी। 

Edited By: Anurag Gupta