लखनऊ, [सौरभ शुक्ला]। घर पर ऑक्सीजन सिङ्क्षलडर का प्रयोग करते समय विशेष सावधानी बरतें। नहीं तो दिक्कत हो सकती है। दो माह से अधिक समय से रखा भरा हुआ सिलि‍ंडर कतई प्रयोग न करें। उसकी गैस आपके शरीर को सांसें थाम सकती है। यह कहना है राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) 11वीं वाहिनी के डिप्टी कमांडेंट नीरज कुमार का। बीते दिनों चिनहट स्थित केटी गैस प्लांट में कर्मचारियों द्वारा बरती गई लापरवाही ही विस्फोट का कारण है। जिसमें तीन लोगों की मौत हुई और आठ से 10 लोग घायल हुए।

ऑक्सीजन सिलि‍ंडर में 2000 पीएसआइ (पौंड स्क्वायर इंच) के प्रेशर से गैस भरी जाती है और लीकेज होने पर इतने ही प्रेशर से निकलती भी है। अगर भरा हुआ सिलि‍ंडर ऊंचाई पर रखा है। किसी कारण से वह गिर गया और उसके वाल्व में दिक्कत हुई तो वह लीकेज होगा। लीकेज होने पर सिलि‍ंडर से बहुत तेजी से गैस निकलती है। जब गैस निकलती है तो वह गुब्बारे से वह निकलने की रफ्तार से पीछे भागता है। इसकी चपेट में जो भी आएगा वह गंभीर रूप से घायल होगा। विस्फोट हुआ तो पूरी इमारत ढहा देगा। इसलिए सिलि‍ंडर की पांच साल में हाईड्रो टेस्टि‍ंग भी करानी जरूरी होती है। जिससे उसकी क्षमता का पता चलता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • कबाड़ी के यहां से पड़े और बिना हाइड्रो टेस्टि‍ंग वाले सिलि‍ंडर में गैस नहीं भरनी चाहिए।
  • घर पर यदि ऑक्सीजन सिलि‍ंडर रखें तो उसे सीधा और क्लंप लगाकर रखें।
  • सिलि‍ंडर को लुढ़काकर नहीं ले जाना चाहिए। इससे वाल्व क्षतिग्रस्त हो सकता है।
  • अधिक ताप वाले स्थान पर सिलि‍ंडर को नहीं रखना चाहिए।

'ऑक्सीजन सिलि‍ंडर के प्रयोग में बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए। अगर उसका प्रयोग घर में कर रहे हैं तो किसी विशेषज्ञ की राय जरूर ले लें। इसे ऊंचाई पर न रखें। दो माह से अधिक समय का भरा हुआ सिलि‍ंडर कतई प्रयोग न करें। वह हानिकारक होगा।'    - नीरज कुमार, डिप्टी कमांडेंट, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल 

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