लखनऊ (जेएनएन)। विधानसभा में मंगलवार को इलाहाबाद में कानून की पढ़ाई कर रहे दलित छात्र दिलीप सरोज की निर्मम हत्या का मामला गूंज उठा। सपा, बसपा और कांग्रेस ने इस मामले पर नियम 56 के तहत सदन की कार्यवाही रोककर दो घंटा चर्चा कराने की मांग रखी और जमकर हंगामा किया। विपक्षी सदस्य वेल में आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने भरोसा दिया कि अभियुक्तों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी। हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने विपक्ष की सूचना को खारिज करते हुए सदन गुरुवार 11 बजे तक के लिये स्थगित कर दिया।

वेल में आकर विपक्ष की नारेबाजी
चर्चा कराये जाने की मांग पूरी न होने पर सपा, बसपा और कांग्रेस के सदस्य वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। दिलीप सरोज को इंसाफ दो, हत्यारों को फांसी दो और योगी जी शर्म करो जैसे विपक्ष के नारों के बीच अध्यक्ष ने सदन स्थगित करने की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि सोमवार को उच्च सदन में भी विपक्ष ने इस मामले को जोर-शोर से उठाया था।इसके पहले विधानसभा में अभिभाषण पर चर्चा के बाद नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने नियम 56 के तहत इलाहाबाद में दिलीप सरोज की हत्या का मामला उठाया। उन्होंने आंध्र में रोहित वेमूला की मौत और सहारनपुर की घटना की कड़ी में इसे जोड़ते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कहा, एक तरफ सरकार दावा करती है कि सभी अपराधी जेल में हैं या यमराज के पास पहुंच गए तो फिर चोरी, डकैती और हत्या जैसी जघन्य वारदात क्या भाजपा के लोग कर रहे हैं। चौधरी ने संसदीय कार्यमंत्री पर गलत बयानी का आरोप लगाया। कहा कि असली मुल्जिम को सरकार बचाना चाहती है। कहीं न कहीं दाल में काला है।
बेरहमी से मौत पर पुलिस की लीपापोती
बसपा के राम अचल राजभर ने भी चर्चा कराने की मांग पर बल देते हुए कहा कि दिलीप सरोज को राड, पत्थरों से बेरहमी से मारा गया और एफआइआर उनकी मौत के बाद दर्ज हुई। पुलिस ने मामले की लीपापोती की और मौत के बाद भी हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। यहां तक कि एससी-एसटी एक्ट भी नहीं लगाया गया। अपराधियों के साथ ही वह पुलिस को भी सजा दिलाने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस दल नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि इस घटना ने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया है। भाजपा शासित राज्य में दलितों पर अत्याचार आम चलन बन गया है। उन्होंने मृतक परिवारीजन को 50 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की भी मांग की। बसपा के दल नेता लालजी वर्मा ने भी पुलिस की लापरवाही की बात उठायी और मुआवजे की रकम 50 लाख करने की मांग रखी। 
उचित कार्रवाई और पुलिस भूमिका की जांच 
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष को भरोसा दिया कि पुलिस भूमिका की जांच और कार्रवाई होगी। नेता प्रतिपक्ष ने अगर मामले को इतना गंभीर समझा होता तो सदन में अखबार में छपी रिपोर्ट को लेकर हंगामा करने की बजाय मामले को कल ही उठाते। सरकार की सहानुभूति पीडि़त परिवार के साथ है। मुख्य अभियुक्त को पकडऩे के लिये तीन टीमें गठित की गई हैं और कई पकड़े गए हैं। घटना को दलित रंग देना ठीक नहीं है क्योंकि यह दो पक्षों का व्यक्तिगत विवाद है और किसी को यह पता नहीं था कि कौन किस बिरादरी का है। वरना अज्ञात में मुकदमा दर्ज नहीं होता। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवारीजन को बीस लाख रुपये सरकार ने दिये हैं। 
अखबार, चैनल नहीं होता तो...
नेता प्रतिपक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री को लक्ष्य करते हुए कहा कि ये गलत बयानी में माहिर हैं। हर बात में अखबार पर आपत्ति करते हैं। अगर अखबार और चैनल नहीं होता तो जहां बैठे हैं, वहां नहीं होते। चौधरी ने कहा कि अखबार यहां नहीं पढ़ा जाएगा लेकिन, उसका संज्ञान क्यों नहीं लिया जाएगा। नेता सदन को सत्ता में लाने का काम अखबार ने किया और जब अखबार के लोग कमियां निकाल रहे तो बुरा लग रहा है। खन्ना ने इसका प्रतिवाद किया। 
छात्रवृत्ति को लेकर विपक्ष का बहिर्गमन
विधानसभा में गरीब छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने के मुद्दे पर खूब हंगामा हुआ। कन्या विद्या धन योजना की तर्ज पर नई योजना लागू करने से इन्कार पर सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद सदस्यों ने वॉकआउट किया।  प्रश्नकाल में सपा के नितिन अग्रवाल के सवाल पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि समाजवादी सरकार के कार्यकाल में शुरू कन्या विद्या धन योजना को वर्ष 2015-16 में परिवर्तित कर दिया गया था। बसपा के लालजी वर्मा ने कहा कि धनाभाव में गरीब बच्चों के लिए पढ़ाई को जारी रखना मुश्किल हो जाता है। कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू व आराधना मिश्रा ने मेधावी छात्रों को आर्थिक मदद दिए जाने की पैरोकारी की। संसदीय कार्यमंत्री ने हाईस्कूल और इंटर कक्षाओं में टॉपर बच्चों के लिए 2000 रुपये मासिक छात्रवृति पोस्ट ग्रेजुएशन तक देने वाली पंडित दीनदयाल छात्रवृत्ति योजना की जानकारी दी। नेता विपक्ष रामगोविंद चौधरी ने सरकार के अडिय़ल रवैये की निंदा कर बहिर्गमन किया तो बसपा, कांग्रेस के अलावा रालोद सदस्य सहेंद्र सिंह भी शामिल हो गए।
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना प्राथमिकता
सपा के संजय गर्ग के प्रश्न पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल ने कोर्ट के आदेश पर शिक्षामित्रों का मामला अटकने की जानकारी दी। उनका कहना था कि कोर्ट के आदेश पर एक लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को हटाया गया। उन्होंने बताया कि 68,000 शिक्षामित्रों की परीक्षा कराकर तत्काल भर्ती कर दी गई थी। जून तक दूसरे चरण की परीक्षा प्रक्रिया पूरी करा दी जाएगी। अनुपमा ने बताया कि शिक्षामित्रों के साथ हमदर्दी है परंतु शिक्षा में सुधार करना सरकार की प्राथमिकता है। नेता विरोधी दल रामगोविंद चौधरी ने मानदेय बढ़ाने की बात उठायी परंतु सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मि
 

Posted By: Nawal Mishra