लखनऊ, जेएनएन। रमजान का महीना आने वाला है और गर्मी अपने शबाब पर है। ऐसे में पढ़ाई करने वाले, ऑफिस जाने वाले या दूसरे कामकाजी लोगों को रोजे में इबादत के साथ अपनी सेहत का भी ख्याल रखना बहुत जरुरी है। रमजान के मुकद्दस महीने में जो लोग रोजा रखते हैं, उन्हें फिट रहने के लिए कई चीजों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। पोषक आहार के साथ दिन की शुरुआत करना बेहतर होगा, शाम में रोजा खोलने के वक्त भी कुछ बातों का ख्याल रख कर खुद को कमजोरी से बचा सकते हैं।

सेहत का ख्याल रखने के लिए जरूरी है कि संतुलित खाना खाया जाए और ये बात रमजान के दिनों में और भी जरूरी हो जाती है। रमजान में इफ्तार व सहरी के  समय अनाज, खजूर, केला, जूस और हरी सब्जियां इत्यादि का सेवन करना चाहिए। इनमें फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, पोटेशियम जैसे तत्व होते हैं, जो शरीर को मजबूत बनाते हैं। इनसे आपको भूख भी कम लगेगी और एसिडिटी की शिकायत भी नहीं होगी। 

शुगर के मरीज भी रख सकते हैं रोजा 

केजीएमयू के डॉक्टर बी. हिमांशु ने बताया कि मधुमेह के मरीज भी रोजा रख सकते हैं, लेकिन कुछ एहतियात करना जरूरी है। सबसे पहले उनके दवा के डोज में बदलाव करने होंगे। रात की दवा या इंसुलिन की डोज बढ़ा दी जाती है। ऐसे मरीज सुबह सहरी में दवा ले कर शाम इफ्तार के बाद दवा ले सकते हैं। तेल और मसाले से बनी चीजों से परहेज करना होगा। तेल-मसाले वाले खाने से ऐसे मरीजों के रक्त में शर्करा का स्तर और कोलेस्ट्रोल का स्तर भी बढ़ सकता हैं। स्वस्थ रहने के लिए और रक्तचाप सामान्य बनाए रखने के लिए तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें। इससे शरीर में पानी की कमी को दूर करने और स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। शाम को रोजा खोलने के बाद हल्का भोजन ही करें। रोजा खोलने के बाद जूस, नींबू पानी आदि लें। 

इफ्तार में एक साथ ज्यादा पानी न पीयें 

ऐसा देखा गया है कि दिन भर रोजे के बाद इफ्तार के समय रोजेदार एक साथ तीन-चार ग्लास पानी पी लेते हैं, जो सही नहीं हैं। डॉक्टरों के मुताबिक दिन भर खाली पेट रहने के बाद एक बार में ज्यादा पानी न पीयें। थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें।  

ये लोग ले सकते हैं रोजे में छूट

ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि रोजा रखना फर्ज है। लेकिन इस्लाम में कुछ लोगों को रोजे में छूट दी है, जिसमें बहुत ज्यादा बुजुर्ग जो चल-फिर नहीं सकते। जो सफर में हों या जो बहुत ज्यादा बीमार हों। इसके अलावा जो दिमागी तौर पर बीमार हैं या जो बालिग नहीं है, उनको भी रोजा न रखने की छूट है।

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Posted By: Anurag Gupta