अयोध्या, जेएनएन। दीपोत्सव पर रामलला के आंगन में भी आस्था का घट छलकता रहा। 492 वर्षों बाद रामजन्मभूमि में दीपोत्सव की छटा बिखरी। इस पावन अवसर आराध्य का साक्षात कराने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। सुरक्षा पाबंदियों की वजह से बाहरी श्रद्धालुओं का पहुंचना मुश्किल रहा, फिर भी तीन हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने रामलला के दरबार में माथा टेका। पार्षद रामेशदास ने कहाकि यह त्रेतायुग के उसी क्षण का स्मरण कराने वाला है, जब श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या आए थे। रामलला के प्रति आस्था निवेदित करने में अधिकांश रामनगरी और आसपास के जिलों के लोग शामिल रहे। रामनगरी के व्यापारी अचल गुप्ता ने पहली पाली में रामलला के दर्शन किए। उन्होंने कहाकि दीपोत्सव पर आराध्य का दर्शन कर कृतार्थ हुआ। 

सुबह से कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए श्रद्धालु भी रामलला को आस्था अर्पित करने पहुंचते रहे। मंदिर की व्यवस्था से जुड़े लोगों की मानें तो श्रद्धालुओं की संख्या में अब इजाफा देखा जा रहा है। प्रतिदिन बढ़ी संख्या में लोग रामलला का दर्शन करने आ रहे हैं। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए उन्हें दर्शन की अनुमति दी जा रही है। शुक्रवार को पहली पाली में 1560 श्रद्धालुओं के रामलला का दर्शन किया, जबकि दूसरी पाली में श्रद्धालुओं की संख्या एक हजार बढ़ गई। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रामजन्मभूमि परिसर में दीप प्रज्वलन के दौरान  कुछ देर के लिए दर्शन कार्य प्रभावित रहा, लेकिन फिर श्रद्धालु अपनी रवानी में रामलला के दर्शन को आना आरंभ हो गए। दीपोत्सव पर तीन हजार 220 श्रद्धालुओं ने रामलला का दर्शन किया।