लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। UP COVID-19 News: कोरोना संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले 11 न्यायिक अधिकारियों के परिजनों को दो-दो करोड़ रुपये देने की मांग उप्र न्यायिक सेवा संघ ने की है।  बुधवार को न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक के साथ हुई वर्चुअल बैठक में इन सभी दिवगंत न्यायिक अधिकारियों के आश्रितों को राजपत्रित अधिकारी के पद पर नौकरी देने की भी मांग की गई। बैठक में उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के न्यायामूर्ति वीरेंद्र श्रीवास्तव व 11 न्यायिक अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी गई। 

न्याय मंत्री ने कहा कि कोरोना से संक्रमित न्यायिक अधिकारियों के इलाज की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। उन्होंने कोरोना महामारी को देखते हुए न्यायिक अधिकारियों के एक वाट्सएप ग्रुप बनाने का सुझाव दिया ताकि एक-दूसरे की आसानी से मदद भी की जा सके।

बैठक में उप्र न्यायिक सेवा संघ के अध्यक्ष रणधीर सिंह की ओर से जो मांग पत्र रखा गया उसमें कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने, न्यायिक अधिकारियों व न्यायालय में कार्यरत कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा देकर इनके परिजनों का प्राथमिकता के आधार टीकाकरण कराने, जिलों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को सरकारी आवास दने, जिनका स्थानांतरण हो उन्हें गेस्ट हाउस व सर्किट हाउस में ठहरने की व्यवस्था देने की मांग की गई है। न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक ने आश्वासन दिया कि सरकार इन मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करेगी।

 

मालूम हो कि कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेश में 11 न्यायिक अधिकारियों की मौत हुई है। इसमें मुरादाबाद के एडीजे पद पर कार्यरत रहे सत्य प्रकाश द्विवेदी,  बदायूं के एडीजे राजीव कुमार, देवरिया के एडीजे  विष्णु प्रताप सिंह, प्रयागराज के एडीजे धीरेंद्र प्रताप सिंह, बस्ती के एडीजे  कृष्ण चंद्र पांडेय, भदोही के एडीजे रहे अमी सिंह, संत कबीर नगर में कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश शकील अहमद खान, लखीमपर के एडीजे राजेश कुमार, सहारनपुर के एडीजे तैयब अहमद, ललितपुर के एडीजे ओमवीर और एटा के सीजेएम पद पर कार्यरत रहे अमित कुमार शामिल हैं। 

 

Edited By: Divyansh Rastogi