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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रक्षामंत्री के प्रतिनिधि की एलडीए और नगर निगम में नहीं हो रही सुनवाई, जानें-क्या है पूरा मामला

By Vikas MishraEdited By:
Published: Fri, 19 Nov 2021 08:49 PM (IST)Updated: Sat, 20 Nov 2021 02:35 PM (IST)

रक्षामंत्री के प्रतिनिधि डा. राघवेंद्र शुक्ला व दिवाकर त्रिपाठी द्वारा कई बार पत्राचार करने के बाद भी डेढ़ सौ मीटर ...और पढ़ें

एलडीए और नगर निगम की खींचतान में रक्षामंत्री के प्रतिनिधि की सुनवाई अधर में लटकी हुई है।
एलडीए और नगर निगम की खींचतान में रक्षामंत्री के प्रतिनिधि की सुनवाई अधर में लटकी हुई है।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि डा. राघवेंद्र शुक्ला व दिवाकर त्रिपाठी द्वारा कई बार पत्राचार करने के बाद भी डेढ़ सौ मीटर रोड न तो लखनऊ विकास प्राधिकरण बना रहा है और न निगम। इसके कारण चिनहट तिराहे से हाईकोर्ट की तरफ जाने वाली सर्विस लेन पूरी तरह से खराब हो चुकी है। सड़क के किनारे अतिक्रमण हावी है। नगर निगम कहता है कि एलडीए बनवाएगा और लखनऊ विकास प्राधिकरण कहता है कि यह क्षेत्र नगर निगम के अंतर्गत आता है। दोनों विभागों की खींचतान में रक्षामंत्री के प्रतिनिधि की सुनवाई अधर में लटकी हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक, यह पत्राचार अगस्त 2021 से चल रहा है। इसका खामियाजा यहां रहने वाले सैकड़ों आवंटी भुगतने को विवश हैं।

लखनऊ विकास प्राधिकरण और नगर निगम की नूरा कुश्ती में लोग जर्जर सड़क पर चलने के लिए मजबूर हैं। यह हाल तब है जब रक्षामंत्री के प्रतिनिधि द्वारा लविप्रा व नगर निगम को पत्र लिखा गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन दोनों विभागों में काम करवाना कितना मुश्किल हैं। जब जनप्रतिनिधि अपना काम नहीं करवा पा रहे तो आम जनता यहां कैसे काम करवा पाएगी। बता दें कि अवस्थापना का कई सौ करोड़ रुपये दोनों विभागों के पास मौजूद है।

पिछले डेढ़ माह से खूब सड़कें बन रही हैं, लेकिन ऐश्वर्य अग्निहोत्री 1-117 विजय खंड, गोमती नगर की यह सड़क नियमों का हवाला देकर नहीं बनाई जा रही है। जबकि नियम कहता है कि अवस्थापना के पैसे का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा सकता है। जागरण से बातचीत में प्रतिनिधि डा. राघवेंद्र शुक्ला बताते हैं कि तर्क दिया जा रहा है कि वर्ष 2008 में नगर निगम को कालोनी हस्तांतरित कर दी गई थी। इसलिए यह एलडीए के कार्यक्षेत्र के बाहर का मामला है।