लखनऊ, जेएनएन। देश में रक्षा उपकरणों के कलपुर्जों के निर्माण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को बढ़ावा दिया जा रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) अपने काम को पेटेंट करा रहे हैं जबकि उनकी तकनीक व डिजाइन के आधार पर कलपुर्जे बनाने का काम एमएसएमई को दिया जा रहा है। लखनऊ में डिफेंस एक्सपो में एमएसएमइ को भी अपना काम आइपीआर में पंजीकृत कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

डिफेंस एक्सपो के तहत शुक्रवार को डिफेंस इंडस्ट्री में बौद्धिक संपदा अधिकार (आइपीआर) को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसका आयोजन एचएएल ने किया था। एचएएल की प्रबंधक (डिजाइन) प्रत्यूषा एम ने रक्षा उद्योग के लिए आइपीआर के आवेदनों के साथ इसकी विभिन्न श्रेणियों पर चर्चा की।

उन्होंने पेटेंट के अलावा कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, इंडस्ट्रियल डिजाइन, ट्रेड सीक्रेट आदि की जानकारी दी। इसके फायदे व नुकसान के बारे में भी विस्तार से बताया। रक्षा उद्योग में इसका क्या असर हो रहा है इसकी भी जानकारी दी। सेमिनार का उद्घाटन एचएएल के निदेशक इंजीनियङ्क्षरग एंड आरएंडडी अरुप चटर्जी ने किया। इस मौके पर एचएएल के जीएम टेक्नीकल कृष्ण कुमार भी शामिल थे।

कई विदेशी कंपनियों के साथ हुआ निवेश पर मंथन

डिफेंस एक्सपो के बड़े शामियाने में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं का अहसास कराने के लिए सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) व निर्यात प्रोत्साहन विभाग ने भी पवेलियन सजाया। यहां एविएशन कंपनी एयरबस के साथ ही अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका की कई कंपनियों संग निवेश संबंधी बैठकें हुईं। विभाग अब संभावनाएं साकार करने में जुटेगा।

यूपी पवेलियन-2 में एमएसएमई विभाग के एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के 65 स्टॉल और खादी के दस स्टॉल के अलावा रक्षा क्षेत्र के उत्पाद बनाने वाली लघु एवं मध्यम इकाइयों के 46 स्टॉल लगाए गए। इसी परिसर में देशी-विदेशी कंपनियों के साथ बैठकों का सिलसिला भी समानांतर चलता रहा। कंपनी प्रतिनिधियों के साथ एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत सहगल ने बातचीत कर प्रदेश सरकार की नीतियों, भूमि की उपलब्धता आदि की जानकारी दी। डॉ. सहगल ने बताया कि एविएशन कंपनी एयरबस भारत में ट्रांसपोर्ट प्लेन सी-295 का प्लांट लगाने का विचार कर रही है, जिस पर 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा और पांच हजार एकड़ भूमि की जरूरत होगी। यह प्लांट उप्र में स्थापित कराने के लिए रक्षा मंत्रालय के माध्यम से प्रयास किया जाएगा। कंपनी हेलीकॉप्टर प्लांट भी लगाना चाह रही है, जिसके लिए भी प्रयास होगा कि वह यूपी में लगे। इसी तरह से यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल, अफ्रीका और कोरिया के प्रतिनिधि दल के साथ बैठकों में चर्चा हुई।

एमएसएमई मंत्री ने बताया कि लगभग सभी कंपनियों का रुख सकारात्मक रहा है। प्रमुख सचिव ने बताया कि इन कंपनियों से लगातार संपर्क कर फॉलोअप किया जाएगा। प्रयास होगा कि इनके साथ फिर से बैठकें तय की जाएं, ताकि अधिक से अधिक निवेश एमएसएमई क्षेत्र में आ सके। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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