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अयोध्‍या में एक नवंबर से शुरू होगा दीपोत्‍सव, पांच सौ ड्रोन कैमरों से दिखाए जाएंगे रामायणकालीन दृश्य

अयोध्‍या में एक से छह नवंबर तक प्रस्तावित है पांचवां दीपोत्सव। इस दौरान जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने एक से छह नवंबर तक प्रस्तावित दीपोत्सव में होने वाले कार्यक्रमो का बि‍ंदुवार ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि दीपोत्सव का मुख्य कार्यक्रम तीन नवंबर को है।

By Anurag GuptaEdited By: Published: Thu, 21 Oct 2021 08:16 PM (IST)Updated: Fri, 22 Oct 2021 07:31 AM (IST)
अयोध्‍या में एक नवंबर से शुरू होगा दीपोत्‍सव, पांच सौ ड्रोन कैमरों से दिखाए जाएंगे रामायणकालीन दृश्य
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति ने दीपोत्सव की तैैयारियों का जायजा लिया।

अयोध्या, जागरण संवाददाता। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश मेश्राम ने नयाघाट स्थित यात्री निवास में पांचवें दीपोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने एक से छह नवंबर तक प्रस्तावित दीपोत्सव में होने वाले कार्यक्रमो का बि‍ंदुवार ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि दीपोत्सव का मुख्य कार्यक्रम तीन नवंबर को है। इस मौके पर प्रस्तावित श्रीराम, माता सीता, अनुज लक्ष्मण के स्वरूप का हेलीकाप्टर रूपी पुष्पक विमान से आगमन तथा उनके स्वागत की तैयारी, रामकथा पार्क में राज्याभिषेक का मंचन, सायंकालीन बेला में नौ लाख दीप जलाए जाने, सरयू आरती, लेजर शो के माध्यम से रामायणकालीन दृश्‍यों का पांच सौ ड्रोन कैमरों से प्रदर्शन, 30 लाइट गेट व पूरे अयोध्या को सजाने, हेलीकाप्टर द्वारा आकाश से पुष्प वर्षा, विदेशी रामलीला व स्थानीय रामलीला दलों की प्रस्तुति होनी है।

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जिलाधिकारी ने बताया कि दीपों को जलाने के लिए टी-शर्ट व कैप में 12 हजार वालेंटियर्स सक्रिय रहेंगे। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति ने आमंत्रण पत्र के साथ मेन्यू का एक फोल्डर लगाने के निर्देश दिए, जिसमें तिथिवार कार्यक्रमों का पूर्ण विवरण व उसका समय व स्थान अंकित होगा। बैठक के बाद प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी व कार्यदायी संस्थाओ के प्रमुखों के साथ रामकथा पार्क के आस-पास व राम की पैड़ी का स्थलीय निरीक्षण भी किया। 

कुम्हारों के सुस्त चाक को दीपावली ने दी रफ्तार : आधुनिकता के इस दौर में भी दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीये जलाना भारतीय सभ्यता व संस्कृति का प्रतीक है। यही कारण है कि दीपावली आने के कुछ दिन पूर्व से ही कुम्हार दीया बनाना शुरू कर देते हैं। सनातन संस्कृति व परंपरा के अनुसार धार्मिक कार्यों में मिट्टी के बर्तनों और दीये की मांग को देखते हुए कुम्हार समाज के लोग इस पुस्तैनी व्यवसाय से आज भी जुड़े हुए हैं।

नवंबर माह के पहले सप्ताह में दीपावली का पर्व है। कुम्हार दीयों के निर्माण में जुट गए हैं। उमापुर के रामचंद्र प्रजापति बचपन से ही मिट्टी के बर्तन और दीयों के निर्माण का कार्य कर रहे हैं। बहापुर के रामनेवाज प्रजापति, कृपाल प्रजापति, रामपाल प्रजापति व तालगांव के दानबहादुर प्रजापति व बंशीलाल प्रजापति कहते हैं कि वर्तमान समय में तमाम तरह के बर्तन बाजार में आ गए हैं। इसलिए मिट्टी के बर्तनों की मांग कम हो गई है। काफी मेहनत के बावजूद मुनाफा कम है। कुम्हारों ने बताया कि 50 से 60 रुपए सैकड़ा दीया बेचते हैं।

मिट्टी का दीया जलाने की अपील : प्राचीन संस्कृति के लिहाज से मिट्टी के दीपक का दीपावली में महत्व है। लोग इसे लेकर जागरूक हुए हैं। चीनी उत्पादों को छोड़कर लोगों का रुझान मिट्टी के दीयों की ओर तेजी से बढ़ा है। युवा प्रशांत तिवारी, सूरज शुक्ल, अमन मिश्र, चंदन तिवारी कहते हैं कि हम सभी कुम्हारों के हाथों से बने मिट्टी के दीपक जलाएंगे। युवाओं ने दीपावली पर सभी से मिट्टी का ही दीपक जलाने की अपील की है। अपने पुश्तैनी धंधे में जुटे इस समाज के लोगों का कहना है कि हर जगह प्लास्टिक के उत्पादों की मांग बढऩे से परिवार की युवा पीढ़ी इस व्यवसाय से मुंह मोडऩे लगी है। तालाब, पोखर की चिकनी मिट्टी पिछले तीन सालों से नहीं मिल पा रही है। 


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