लखनऊ [ज्ञान बिहारी मिश्र]। अगर आप सोचते हैं कि बैंक में आपका पैसा सुरक्षित है तो सचेत हो जाएं। साइबर अपराधियों ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा में सेंधमारी कर दी है। बैंकों की पारंपरिक सुरक्षा प्रणाली जालसाजों के सामने बौनी साबित हो रही है और प्रदेश में हर रोज लोगों के खातों से लाखों रुपये निकल रहे हैं। एक अंजान लिंक पर क्लिक करने से आपके खाते में जमा रकम चंद मिनट में पार हो सकती है। 

साइबर अपराधियों ने भी अब ठगी का पैटर्न बदल दिया है। स्कीमर लगाकर कार्ड क्लोनिंग के जरिए करोड़ों रुपये पार करने के बाद जालसाजों ने नया तरीका इजाद किया है। ठग अब प्रमुख कंपनियों के नाम से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। इनके निशाने पर ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोग सर्वाधिक हैं।

जालसाज अब क्यू आर कोड (क्विक रिस्पांस कोड) के लिंक के जरिए बैंक खाते हैक करने लगे हैं। ठग ओएलएक्स और फ्लिपकार्ट समेत अन्य वेबसाइट पर खरीदारी करने वाले लोगों को झांसे में ले रहे हैं। इस दौरान वह किसी सामान के क्रय विक्रय की बात फाइनल कर ऑनलाइन पेमेंट की बात कहते हैं। इसके बाद लोगों के वाट्सएप नंबर पर एक लिंक भेजते हैं। जैसे ही लोग उस लिंक पर क्लिक करते हैं, ठग लोगों के मोबाइल फोन का क्यूआर कोड स्कैन कर खाते में रकम पार कर दे रहे हैं।

वाट्सएप को बनाया ठगी का हथियार

साइबर अपराधी सामान्य कॉल की जगह वाट्सएप कॉल करते हैं। साइबर अपराधी लोगों का भरोसा जीतने के लिए खुद को सैन्यकर्मी होने का झांसा देते हैं। वह प्रोफाइल पर सेना की फोटो भी लगाते हैं। ठगी के बाद जालसाज पीडि़त का नंबर ब्लॉक लिस्ट में डाल देते हैं।

बैंककर्मी बनने लेकर क्लोनिंग तक

तकरीबन एक दशक पहले साइबर अपराध के मामले एकाएक सामने आए थे। पिछले पांच साल में साइबर क्राइम तेजी से बढ़ा और फिर मानों बाढ़ सी आ गई। खुद को बैंककर्मी बताकर लोगों को फोन कर उनसे खाते की जानकारी लेकर ठगी का सिलसिला शुरू हुआ था। इसके बाद ठग हाइटेक हुए और उन्होंने कार्ड क्लोनिंग तक शुरू कर दिया। अब एटीएम कार्ड लोगों की जेब में रहता है और रकम निकाल ली जाती है।

ऐसे होता है कार्ड का डाटा चोरी 

  • स्कीमर - ठग स्कीमर (डाटा चोरी करने की डिवाइस) का इस्तेमाल एटीएम के कार्ड रीडर स्लॉट में लगाकर डाटा चोरी में करते हैं।
  • शोल्डर सर्फिंग- इसके माध्यम से ठग आपको मदद का झांसा देते हैं और फिर आपका कार्ड बदल लेते हैं।

  • हिडेन कैमरा - जालसाज एटीएम में डिेन कैमरे लगाते हैं। इसके माध्यम लोगों के एटीएम कार्ड की जानकारी और पिन कोड चोरी कर लिया जाता है। 

  • फर्जी कीबोर्ड - एटीएम में कीबोर्ड पर साइबर अपराधी फर्जी कीबोर्ड चिपका देते हैं, जिसपर कार्ड की सारी जानकारी चस्पा हो जाती है। 
  • मर्चेंट/प्वाइंट ऑफ सेल - इसके माध्यम से स्वैपिंग मशीन में एटीएम कार्ड डालने के दौरान ठग मैगनेटिक स्ट्रीप का प्रयोग कर डाटा चोरी कर लेते हैं।
  • फिशिंग- फिशिंग के माध्यम से लोगों को स्पैम ई-मेल कर गोपनीय डाटा चोरी की जाती है। 

एक्सपर्ट की सलाह 

एसटीएफ के एडिशनल एसपी व साइबर विशेषज्ञ विशाल विक्रम सिंह का कहना है कि मोबाइल फोन या कंप्यूटर परजिस लिंक के बारे में आपको जानकारी नहीं है, उसे न खोलें। किसी बैंक की ओर से कभी भी फोन पर खाते की डिटेल नहीं मांगी जाती है। कोई साफ्टवेयर डाउनलोड करने पर सतर्कता बरतें।

 

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